
रायपुर: छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है, लेकिन सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों की 12 दिन पुरानी हड़ताल के कारण सरकारी सिस्टम बुरी तरह से लड़खड़ा गया है। हड़ताली कर्मियों की गैरहाजिरी से खरीदी प्रक्रिया अधर में लटक गई है। इसी बीच सरकार ने बिना अनुभव वाले विभागीय कर्मचारियों और अफसरों को उपार्जन केंद्रों पर तैनात कर वैकल्पिक व्यवस्था का दावा किया है, पर यह तैयारी सवालों के घेरे में है।
बिना अनुभव वाले अफसर कैसे संभालेंगे ऑनलाइन खरीदी?
सरकार की वैकल्पिक तैयारियों पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना अनुभव वाले नए कर्मचारी ऑनलाइन धान खरीदी जैसे जटिल और हाई-टेक सिस्टम को संभाल पाएंगे? धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिस्टम लॉगिन, QR आधारित टोकन, वजन-अनुमोदन, और ऑनलाइन पेमेंट फ़ॉरवर्डिंग जैसी प्रक्रियाएँ एक दिन में सीखी जाने वाली नहीं हैं, जिसके लिए अनुभवी कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
विभिन्न विभागों के कर्मचारी उपार्जन केंद्रों पर तैनात
धान खरीदी की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए सहकारिता विभाग के निर्देशों के तहत विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को अस्थायी रूप से जिम्मेदारी दी गई है। इस आदेश के तहत कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, बैंक सुपरवाइजर और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों को उनके मूल कर्तव्यों के साथ ही जिले के अलग-अलग धान उपार्जन केंद्रों पर संलग्न किया गया है।
जमीनी हकीकत चिंताजनक, किसानों का धैर्य टूटा
धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन 12 दिनों से सहकारी समिति कर्मचारी और खरीदी ऑपरेटर हड़ताल पर डटे हैं, जिनके बिना खरीदी चल पाना लगभग असंभव है। इसके बावजूद सरकार वैकल्पिक कर्मचारियों के भरोसे खरीदी शुरू कराने की जिद पर अड़ी है। अगर नए कर्मचारी तकनीकी प्रक्रिया में उलझते हैं, तो इसका सीधा नुकसान किसानों को होगा, जिनका धैर्य टूटने लगा है, क्योंकि उन्हें अपने पंजीयन और टोकन को लेकर भारी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रेनिंग बनाम अनुभव: प्रशासन के दावों पर संदेह
प्रशासन यह दावा कर रहा है कि 140 केंद्र तैयार हैं और राजस्व, कृषि, खाद्य और सहकारिता विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर सवाल यह है कि कुछ घंटों में प्रशिक्षित हुए कर्मचारी इतनी जटिल ऑनलाइन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक कैसे लागू कर पाएंगे। केंद्रों में आधी अधूरी तैयारियों के बीच किस तरह खरीदी होगी, यह देखना अभी बाकी है और यह किसानों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
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