
धमतरी जिले के कुरूद ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम रावनगुड़ा में अवैध शराब की बिक्री को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। गांव के सामाजिक माहौल में घुलते जहर से परेशान होकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के सार्वजनिक स्थलों पर खुलेआम शराब बेची जा रही है जिससे न केवल युवाओं की राह भटक रही है बल्कि आए दिन होने वाले विवादों से शांति व्यवस्था भी भंग हो रही है। प्रशासन को दिए आवेदन में ग्रामवासियों ने स्पष्ट किया है कि वे लंबे समय से इस अवैध कारोबार का विरोध कर रहे हैं लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई न होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
मंगल भवन में जाम छलकाने पर विवाद: 5 अप्रैल की घटना ने बढ़ाई नाराजगी
अवैध शराब के खिलाफ यह आक्रोश तब और बढ़ गया जब 5 अप्रैल 2026 को गांव के मंगल भवन में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान कुछ लोग कथित रूप से शराब बेचते पाए गए। ग्रामीणों ने मौके पर ही कड़ी आपत्ति जताई और संबंधित व्यक्तियों को समझाइश देने की कोशिश की लेकिन मामला शांत होने के बजाय और बिगड़ गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पवित्र और सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल नशे के कारोबार के लिए करना बर्दाश्त के बाहर है। इस घटना के बाद पूरे गांव ने एकजुट होकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसने की मांग की है।
प्रशासन को अल्टीमेटम: 13 अप्रैल को एसपी दफ्तर के घेराव की तैयारी
ग्रामवासियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम भी दे दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई तो वे 13 अप्रैल 2026 को पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन और प्रशासन की होगी। गांव की महिलाओं और युवाओं ने साफ कर दिया है कि वे अपने गांव को नशामुक्त बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
बिगड़ता सामाजिक ढांचा: अवैध नशे से ग्रामीण परेशान
रावनगुड़ा के निवासियों के अनुसार अवैध शराब की गतिविधियों के चलते गांव का घरेलू और सामाजिक ढांचा पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। शराब के कारण होने वाले शोर-शराबे और झगड़ों से आमजन का जीना मुहाल हो गया है। ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर गांव में नियमित गश्त करें और उन ठिकानों को ध्वस्त करें जहां से शराब की सप्लाई की जा रही है। अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या 13 अप्रैल से पहले गांव में शांति बहाली के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या ग्रामीणों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।



