
Bilaspur Train Accident Update: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मंगलवार शाम चार बजे एक बड़ा रेल हादसा हुआ। लालखदान स्टेशन के पास गेवरारोड से आ रही मेमू लोकल ट्रेन उसी ट्रैक पर खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मेमू ट्रेन का इंजन हिस्सा मालगाड़ी के गार्ड केबिन के ऊपर चढ़ गया। हादसे में 10 यात्रियों की मौत हो गई जबकि 25 से अधिक यात्री घायल हो गए।

रेलवे की ओर से मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायल यात्रियों को 1 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। साथ ही यात्रियों और उनके परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
टक्कर की भयावह तस्वीर, इंजन चढ़ गया मालगाड़ी के गार्ड केबिन पर
घटना की शुरुआती जानकारी के अनुसार, गेवरारोड से बिलासपुर के बीच चलने वाली नियमित पैसेंजर मेमू ट्रेन रोज की तरह सवारियों को लेकर रवाना हुई थी। शाम करीब 4 बजे जैसे ही ट्रेन लालखदान सबवे के पास पहुंची, सामने खड़ी मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि पैसेंजर ट्रेन का इंजन मालगाड़ी के गार्ड केबिन के ऊपर जा चढ़ा।
टक्कर के बाद डिब्बों में बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। वहीं रेलवे, प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए।
मौके पर पहुंचा प्रशासन, राहत और बचाव कार्य जारी
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे जीएम, डीआरएम, कमिश्नर, एसपी और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। हादसे में घायल यात्रियों को रेलवे अस्पताल, सिम्स और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए विशेष टीम बनाई गई है।
रेलवे की रिलीफ ट्रेन भी घटना स्थल पर भेजी गई और बचाव दलों ने ट्रेन के डिब्बों में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। प्रशासन ने बताया कि राहत कार्य देर रात तक जारी रहा और रेस्क्यू के लिए कई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।

ओवरस्पीड बनी हादसे की बड़ी वजह, सिग्नल सिस्टम से जुड़ी चूक
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे की वजह ट्रेन की ओवरस्पीड और सिग्नलिंग सिस्टम की गड़बड़ी हो सकती है। रेलवे में हाल ही में ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली शुरू की गई है, जिसमें एक निश्चित सीमा के भीतर ट्रेन चलाने की अनुमति होती है। इस सिस्टम के तहत एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनें चलाई जा सकती हैं।
जानकारी के अनुसार, मेमू ट्रेन का चालक निर्धारित सीमा से अधिक गति पर ट्रेन चला रहा था। अचानक मालगाड़ी के सामने आने से वह ट्रेन को नियंत्रित नहीं कर पाया और टक्कर हो गई। इस प्रणाली के अनुसार, दिन में 15 किलोमीटर प्रति घंटे और रात में 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेनें चलानी होती हैं, लेकिन प्रारंभिक जांच में नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।
अप, मिडिल और चौथी लाइन बंद, डाउन लाइन पर शुरू हुआ संचालन
हादसे के बाद अप लाइन, मिडिल लाइन और चौथी लाइन को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। तीनों लाइनों पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई थी ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए। लगभग तीन घंटे बाद डाउन लाइन को खोल दिया गया। इसके बाद बिलासपुर स्टेशन में रुकी ट्रेनों को एक-एक कर रवाना किया गया। सबसे पहले गोंडवाना एक्सप्रेस को बिलासपुर से रवाना किया गया। रेलवे ने कहा कि ट्रैक बहाली का काम जारी है और जल्द ही सभी लाइनों को सामान्य रूप से चालू कर दिया जाएगा।

अंधेरा बना बाधा, देर से शुरू हुआ राहत कार्य
यह हादसा शाम चार बजे हुआ था, लेकिन राहत और बचाव कार्य आधे घंटे बाद शुरू हो पाया। मौके पर रोशनी की उचित व्यवस्था न होने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आईं। रेलवे प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं कि समय पर बिजली और लाइट की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बचाव कार्य में बाधा उत्पन्न हुई।
काफी देर बाद जब लाइट की व्यवस्था की गई, तब जाकर राहत कार्य दोबारा शुरू हुआ। वहीं रिलीफ ट्रेन भी निर्धारित समय से काफी देर बाद मौके पर पहुंची, जिससे रेस्क्यू की गति धीमी रही।

रेलवे ने घोषित की अनुग्रह राशि, मृतकों को 10 लाख, घायलों को 5 लाख
बिलासपुर के गतौरा के पास हुए इस दर्दनाक हादसे में रेलवे ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है।
रेलवे प्रशासन ने कहा है कि-
- मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये
- गंभीर रूप से घायल यात्रियों को 5 लाख रुपये
- सामान्य रूप से घायल यात्रियों को 1 लाख रुपये
की अनुग्रह राशि दी जाएगी। रेलवे की ओर से कहा गया कि सभी प्रभावित यात्रियों को तत्काल राहत और चिकित्सकीय सहायता प्रदान की जा रही है।

घटना की जांच शुरू, अधिकारियों ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
रेलवे ने इस हादसे के बाद उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। जांच में सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रेन की स्पीड, ड्राइवर की जिम्मेदारी और ट्रैक की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक जांच के बाद रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंपी जाएगी।



