CG Vegetable Price Hike: टमाटर से लेकर हरी सब्जियां तक महंगी: सब्जी का दाम 30% तक बढ़ा, रसोई का बिगड़ा बजट

CG Vegetable Price Hike: छत्तीसगढ़ के दुर्ग और भिलाई के खुदरा बाजारों में इस हफ्ते सब्जियों की कीमतों में अचानक जोरदार उछाल आया है। भीषण गर्मी की मार और स्थानीय स्तर पर सब्जी की पैदावार घटने के कारण बाजार में आवक काफी कम हो गई है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की सब्जी-भाजी के दामों पर पड़ा है, जो पिछले कुछ दिनों में करीब 30 प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं। इस महंगाई ने आम उपभोक्ताओं की रसोई का मासिक बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार, ईंधन के दाम बढ़ने से मालभाड़ा भी महंगा हुआ है, जिससे लागत बढ़ गई है। आने वाले कुछ दिनों तक लोगों को इस महंगी सब्जी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है।

मालभाड़ा बढ़ने से 10 रुपए किलो तक महंगी हुई सब्जियां, मंडियों में कम हुई आवक

स्थानीय खुदरा दुकानदारों के मुताबिक पिछले एक सप्ताह के भीतर ही ज्यादातर हरी सब्जियों के दाम में 8 से 10 रुपए प्रति किलो की सीधी बढ़ोतरी हो चुकी है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुआ इजाफा है, जिसके चलते बाहरी क्षेत्रों से आने वाली गाड़ियों का परिवहन भाड़ा बढ़ गया है। ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने से थोक मंडियों तक माल पहुंचाना खर्चीला साबित हो रहा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की स्थानीय बाड़ियों में कड़े मौसम की वजह से उत्पादन काफी कम हो गया है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर ने खुदरा बाजार में कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।

छत्तीसगढ़ की बाड़ियां सूखी, अब महाराष्ट्र और गुजरात की सब्जियों पर निर्भर हुए दुर्ग-भिलाई के बाजार

दुर्ग और भिलाई के मुख्य सब्जी बाजार अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से बाहरी राज्यों पर निर्भर हो गए हैं। स्थानीय उत्पादन लगभग ठप होने की कगार पर पहुंचने से थोक कारोबारी अब महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की मंडियों से माल मंगा रहे हैं। जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ की स्थानीय बाड़ियों से आवक बंद हो रही है, वैसे-वैसे बाजार में बाहरी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। बाहरी राज्यों से लंबी दूरी तय करके आने वाली इन सब्जियों पर अतिरिक्त पैकेजिंग और कोल्ड स्टोरेज का खर्च भी जुड़ रहा है, जिससे खुदरा बाजार में कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर की तरफ बढ़ रही हैं।

थोक मंडी में 25 से 30 प्रतिशत चढ़े दाम, बीन्स और मुनगा की कीमतों में रोजाना हो रही बढ़ोतरी

दुर्ग सब्जी मंडी के पूर्व अध्यक्ष नासिर खोखर ने बाजार के ताजा हालातों की जानकारी देते हुए बताया कि थोक मंडी के स्तर पर ही अधिकांश सब्जियों की कीमतें 25 से 30 प्रतिशत तक उछल चुकी हैं। विशेषकर बीन्स, मुनगा (सहजन) और हरी मिर्च जैसी रोजमर्रा की चीजों के थोक दाम हर सुबह नए रिकॉर्ड के साथ खुल रहे हैं। थोक बाजार में आ रही इस तेजी के कारण छोटे फुटकर व्यापारियों के लिए भी कम कीमत पर माल बेचना नामुमकिन हो गया है। मंडी के जानकारों का कहना है कि अगर मौसम का यही मिजाज रहा और बाहरी राज्यों से भी आवक सीमित हुई, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।

बीन्स और लहसुन 150 रुपए किलो के पार, मिर्च और मुनगा ने भी आम जनता को रुलाया

इस समय खुदरा बाजार में कई जरूरी सब्जियों के दाम आम मध्यमवर्गीय परिवार की पहुंच से बाहर होते दिख रहे हैं। बाजार में इस समय अलग-अलग सब्जियों के भाव इस प्रकार चल रहे हैं:

  • बीन्स और लहसुन: खुदरा बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली बीन्स और लहसुन का भाव 140 से 150 रुपये प्रति किलो के बीच बना हुआ है।
  • मुनगा और ढेंस: ये दोनों सब्जियां भी बाजार में 100 रुपये प्रति किलो से ऊपर के भाव पर बिक रही हैं।
  • हरी मिर्च: खाने का स्वाद बढ़ाने वाली हरी मिर्च के दाम भी इस समय 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

टमाटर के दाम हुए दोगुने, भिंडी, करेला और शिमला मिर्च की कीमतों में भी भारी उछाल

कुछ दिन पहले तक जो टमाटर खुदरा बाजार में बेहद सस्ते यानी 20 से 25 रुपये प्रति किलो के भाव पर आसानी से मिल रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 35 से 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। वहीं, बढ़िया क्वालिटी का लाल टमाटर मंडियों में 50 रुपये किलो से अधिक दाम पर बिक रहा है। टमाटर के साथ-साथ गाजर, भिंडी, करेला, फूलगोभी और शिमला मिर्च जैसी दूसरी प्रमुख सब्जियों के भाव में भी पिछले हफ्ते के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है, जिससे लोग अब सीमित मात्रा में ही सब्जियां खरीद रहे हैं।

नींबू 5 रुपए का एक नग बिका, जब तक नई फसल नहीं आती तब तक राहत के आसार नहीं

गर्मी के इस सीजन में सबसे ज्यादा मांग वाले नींबू की कीमत भी बढ़ गई है और अब यह खुदरा दुकानों में 5 रुपये प्रति नग के हिसाब से बिक रहा है। आलू और प्याज जैसी सदाबहार सब्जियां भी अब 20 से 25 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई हैं। थोक मंडी में इस समय रोजाना केवल 25 से 30 गाड़ियों की ही आवक हो पा रही है। फिलहाल हरी मिर्च जगदलपुर और उत्तर प्रदेश से, लहसुन और मुनगा महाराष्ट्र-गुजरात से और शिमला मिर्च हरियाणा से मंगाई जा रही है। व्यापारियों का साफ कहना है कि जब तक स्थानीय बाड़ियों में नई फसल की पैदावार शुरू नहीं होती, तब तक कीमतों में कमी की कोई गुंजाइश नहीं है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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