
Kachan Gadi Ritual Bastar Dussehra: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और जनजातीय परंपराओं के प्रतीक विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक ‘बस्तर दशहरा’ महापर्व का आधिकारिक शुभारंभ हो चुका है। करीब सात शताब्दियों पुरानी इस गौरवशाली परंपरा का आगाज पारंपरिक अनुष्ठान ‘काछन गादी’ के साथ हुआ। बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित इस विधान को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और देश-विदेश से आए पर्यटक पहुंचे। काछन गादी की रस्म पूरी होने के साथ ही अगले 75 दिनों तक चलने वाले इस दुनिया के सबसे लंबे दशहरा पर्व की विधिवत शुरुआत हो गई है।

काटों के झूले पर देवी स्वरूपा बालिका ने दी पूजा संपन्न कराने की अनुमति
Maa Kachan Devi Puja Bastar: काछन गादी अनुष्ठान के दौरान पनका समाज की नाबालिग कुंवारी कन्या पीहू ने मां काछनदेवी का स्वरूप धारण किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूजा विधान के समय देवी का वास बालिका के शरीर में होता है। कांटों से तैयार किए गए झूले पर देवी स्वरूपा बालिका को लिटाकर यह कठिन अनुष्ठान पूरा किया गया। इसके बाद देवी ने बस्तर राजपरिवार, अंचल के ग्रामीणों और प्रशासन को आगामी 75 दिनों के सभी धार्मिक आयोजनों को बिना किसी बाधा के संपन्न कराने की सहमति और अनुमति प्रदान की।

बस्तर राजपरिवार और माटी पुजारी ने लिया मां काछनदेवी और रैला देवी का आशीर्वाद
Bastar Dussehra 2026: अनुष्ठान संपन्न होने के बाद बस्तर राजपरिवार के सदस्य और माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने मां काछनदेवी के सामने शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके तुरंत बाद वे गोलबाजार पहुंचे, जहां उन्होंने मिरगान समुदाय की इष्ट देवी मां रैला देवी की पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की। इन सभी पूजा विधानों के पूरा होते ही काछन गुड़ी और आसपास का पूरा क्षेत्र पारंपरिक वाद्ययंत्र ‘मोहरी बाजा’ की मंगल ध्वनि से गूंज उठा।

देश-विदेश के पर्यटकों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ अनुष्ठान
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए स्थानीय निवासियों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बस्तर सांसद और बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, उपाध्यक्ष बलराम मांझी, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी शलभ सिन्हा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए श्रद्धालुओं की सहूलियत का ध्यान रखा।

बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित है यह ऐतिहासिक महापर्व
बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का जीता-जागता प्रमाण है। बस्तर क्षेत्र की कुलदेवी और आराध्य मां दंतेश्वरी को समर्पित यह पर्व अपनी अनूठी सामाजिक समरसता के लिए जाना जाता है, जिसमें हर समाज और वर्ग की अलग-अलग भूमिका तय होती है। इस पर्व में रावण दहन की परंपरा नहीं होती, बल्कि प्राकृतिक शक्तियों और लोक देवियों की आराधना की जाती है।

काछन गादी के बाद अब जोगी बिठाई और विशाल काष्ठ रथ परिक्रमा की तैयारी
काछन गादी की रस्म संपन्न होने के साथ ही बस्तर दशहरा के अन्य प्रमुख अनुष्ठानों का मार्ग प्रशस्त हो गया है। आने वाले दिनों में विशालकाय द्वि-स्तरीय और अष्ट-चक्र काष्ठ रथ का निर्माण, जोगी बिठाई, भीतर रैनी, बाहर रैनी और विशाल जनसभा यानी ‘मुरिया दरबार’ जैसे अनूठे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन सभी पारंपरिक आयोजनों को लेकर बस्तर अंचल के साथ-साथ पूरे प्रदेश में जबरदस्त उत्साह और उत्सुकता का माहौल है।

75 दिनों तक बस्तर में बना रहेगा उत्सव का माहौल, उमड़ेंगे पर्यटक
दुनिया भर के पर्यटकों के लिए बस्तर का यह दशहरा पर्व विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। अगले दो महीनों से अधिक समय तक जगदलपुर शहर और आसपास के इलाकों में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। जिला प्रशासन और पर्यटन मंडल ने बाहरी श्रद्धालुओं और विदेशी सैलानियों के लिए विशेष गाइड, आवास और परिवहन की व्यवस्था की है ताकि वे बस्तर की इस अनुपम लोक परंपरा का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें।



