
CG Labour Protest: उत्तर प्रदेश के नोएडा से शुरू हुई मजदूरों की नाराजगी की लहर अब छत्तीसगढ़ के वनांचल तक पहुंच गई है। दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में एनएमडीसी प्लांट के पाइपलाइन विस्तार का काम कर रही दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के खिलाफ श्रमिकों ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर मजदूर पिछले तीन दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कामगारों का आरोप है कि कंपनी उनका हक मार रही है और श्रम नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस आंदोलन के चलते प्लांट परिसर में तनाव का माहौल है और काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
12 घंटे ड्यूटी और 11 घंटे का वेतन, मजदूरों में भारी आक्रोश
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने कंपनी पर गंभीर आर्थिक शोषण के आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि उनसे हर दिन 12 घंटे तक कड़ी मेहनत कराई जाती है, लेकिन जब पैसे देने की बारी आती है तो केवल 11 घंटे का ही भुगतान किया जाता है। रोजाना एक घंटे की मजदूरी काटी जा रही है जो महीने के अंत में एक बड़ी राशि बन जाती है। इसके अलावा कामगारों ने यह भी शिकायत की है कि पिछले दो सालों से उन्हें मिलने वाले बोनस में भी कटौती की गई है। बार-बार निवेदन के बाद भी कंपनी प्रबंधन इस विसंगति को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।
मजदूरी की दरों में घालमेल, रेट लिस्ट गायब होने से बढ़ा शक
श्रमिकों ने वेतन वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आंदोलनकारियों के मुताबिक कंपनी कुशल (Skilled) और अकुशल (Unskilled) मजदूरों के बीच कोई फर्क नहीं कर रही है और दोनों को एक समान मजदूरी थमा दी जाती है। नियम के अनुसार दोनों की दरों में स्पष्ट अंतर होना चाहिए। मजदूरों का यह भी कहना है कि कंपनी ने कार्यस्थल पर कहीं भी मजदूरी की रेट लिस्ट चस्पा नहीं की है। जब भी कोई कामगार इस बारे में जानकारी मांगता है तो अधिकारी टालमटोल कर देते हैं, जिससे मजदूरों का अविश्वास और गहरा गया है।
भीषण गर्मी और सुविधाओं का अभाव, बीमार पड़ रहे हैं कामगार
वेतन के साथ-साथ कार्यस्थल की बदतर स्थिति भी मजदूरों की नाराजगी का बड़ा कारण है। दंतेवाड़ा की तपती धूप और 45 डिग्री के भीषण तापमान में मजदूरों से काम लिया जा रहा है, लेकिन उनके लिए पीने के ठंडे पानी तक की व्यवस्था नहीं है। बुनियादी सुविधाओं जैसे शौचालय और आराम करने की जगह का भी अभाव बताया जा रहा है। मजदूरों का आरोप है कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी होने के बावजूद एलएंडटी अपने कर्मचारियों के साथ मानवीय व्यवहार नहीं कर रही है। सुविधाओं की कमी के कारण कई श्रमिक बीमार भी हो रहे हैं।
कंपनी का बचाव: ‘समाधान ऐप’ से सुलझा रहे हैं हर विवाद
दूसरी ओर एलएंडटी प्रबंधन ने मजदूरों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी के अधिकारी गिरधर भट्टा का कहना है कि भुगतान केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी की दरों के आधार पर ही किया जा रहा है। प्रबंधन के मुताबिक वे स्थानीय श्रम नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि कंपनी के पास शिकायतों के निपटारे के लिए ‘समाधान ऐप’ मौजूद है, जिस पर कोई भी मजदूर अपनी समस्या दर्ज करा सकता है। प्रबंधन का मानना है कि कुछ गलतफहमियों की वजह से यह विवाद खड़ा हुआ है।
वार्ता विफल, मजदूरों ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
फिलहाल कंपनी के अधिकारियों और मजदूरों के बीच हुई बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। प्रदर्शनकारी मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मजदूरी का पूरा हिसाब नहीं होता और बोनस की विसंगति दूर नहीं की जाती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही लिखित आश्वासन नहीं मिला तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगा। किरंदुल पुलिस और प्रशासन भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
औद्योगिक शांति पर उठ रहे सवाल, समाधान की तलाश जारी
किरंदुल जैसे संवेदनशील इलाके में चल रहे इस प्रदर्शन ने औद्योगिक शांति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एनएमडीसी के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में हो रही देरी का असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते प्रबंधन ने मजदूरों की बुनियादी जरूरतों और शिकायतों पर गौर नहीं किया तो यह आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर टिके हैं और किरंदुल प्लांट के बाहर मजदूरों की नारेबाजी गूंज रही है।



