
रायपुर: CG Liquor Misbrand: त्यौहारी सीजन की शुरुआत के बीच छत्तीसगढ़ से बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार की देशी शराब को भी अमानक पाया गया है। राहौद स्थित देशी शराब दुकान से लिए गए नमूने की जांच में छोटे-छोटे माइक्रो पार्टिकल पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी शराब पीना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
शराब के साथ खाद्य पदार्थों के सैंपल भी फेल
राज्य खाद्य एवं औषधि विभाग ने इस साल जनवरी से सितंबर तक करीब 245 खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए रायपुर स्थित लैब भेजे। इनमें से कई रिपोर्ट अब तक लंबित हैं। वहीं जो रिपोर्ट आई हैं, उनमें वेज बिरयानी और देशी शराब जैसे सैंपल फेल हुए हैं। दोनों मामलों को एडीएम कोर्ट में पेश किया गया है, जहां जुर्माना लगाया जाएगा।
जांच रिपोर्ट आने में हो रही लंबी देरी
नियम के मुताबिक जांच रिपोर्ट 15 दिन में आ जानी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में रिपोर्ट आने में डेढ़ से दो महीने का वक्त लग रहा है। त्यौहारों पर सैंपलिंग बढ़ने से यह देरी और बढ़ जाती है। इसका सीधा फायदा मिलावटखोरों को मिलता है, जो त्योहारों के दौरान खराब सामान बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं।
पूरे प्रदेश के लिए केवल एक लैब एनालिस्ट
चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे प्रदेश की खाद्य सामग्रियों की जांच के लिए केवल राजधानी रायपुर में एक ही प्रयोगशाला है और वहां भी केवल एक लैब एनालिस्ट कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि यह एनालिस्ट भी कांट्रेक्ट बेस पर है और रिटायरमेंट के बाद सेवाएं दे रहे हैं।
स्वास्थ्य पर सीधा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अमानक खाद्य पदार्थ और शराब का सेवन करने से लीवर, किडनी और पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके बावजूद समय पर रिपोर्ट न आने से लोग अनजाने में मिलावटी या खराब सामान का सेवन कर रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अपर्णा आर्या ने बताया कि “जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है, लेकिन लगातार कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट फेल होने पर कोर्ट में केस दर्ज किया जाता है।”



