छत्तीसगढ़ में रेत खदान बंद, माफिया कर रहे मनमानी, दोगुनी कीमत पर बिक रही रेत

रायपुर, जून 2025 – छत्तीसगढ़ में 15 जून से मानसून की वजह से सभी रेत घाट बंद कर दिए गए हैं, लेकिन इसके बाद से रेत का बाजार पूरी तरह माफियाओं के कब्जे में आ गया है। प्रशासन ने एक हाइवा रेत की अधिकतम कीमत 5500 से 7000 रुपये तय की थी, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और ही हैं। रेत सप्लायर और घाट संचालक 15,000 से 20,000 रुपये तक वसूली कर रहे हैं।

CG Sand Mining: प्रशासन आंख मूंदे बैठा है और खनिज विभाग की निष्क्रियता से रेत माफिया बेलगाम हो गए हैं। आम आदमी और बिल्डर मजबूरी में महंगी रेत खरीदने को मजबूर हैं, जिससे मकान और भवन निर्माण के काम प्रभावित हो रहे हैं।

मनमानी कीमत में बेच रहे रेत

CG Illegal Sand Mining: सरकारी नियमों के मुताबिक, रेत की खनन लागत 50 रुपये प्रति घन मीटर तय की गई है। एक हाइवा रेत की कुल कीमत 5500 से 7000 रुपये होनी चाहिए, लेकिन अब यह कीमत 18,000 से 20,000 रुपये तक पहुंच गई है।

बिल्डरों का कहना है कि अगर इस रेट पर रेत खरीदें तो निर्माण लागत दोगुनी हो जाएगी। वहीं खनिज विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

“स्टॉक से लोडिंग” के नाम पर मनमानी

रेत सप्लायर्स का कहना है कि घाट संचालक स्टॉक से रेत देने के लिए भी 5000 रुपये तक वसूल रहे हैं। यानी जहां पहले रेत घाटों से सीधे सप्लाई होती थी, अब वहां से भी ब्लैक में डीलिंग हो रही है।

छत्तीसगढ़ रेत हाइवा संघ का तर्क है कि जब घाट से ही महंगी रेत मिल रही है, तो वो सस्ती कैसे बेचें?

बारीक रेत बनी सबसे महंगी

रेत के बाजार में बारीक रेत सबसे ज्यादा महंगी हो गई है। यह 22 रुपये प्रति फीट से कम में नहीं मिल रही, जबकि सामान्य दिनों में यह 12-14 रुपये प्रति फीट के बीच रहती थी।

मध्यम रेत भी 18-20 रुपये प्रति फीट बिक रही है। प्लास्टर जैसे कामों के लिए बारीक रेत की अनिवार्यता के चलते लोग मजबूरी में इसे खरीद रहे हैं।

अवैध खनन भी जारी, जांच का नामो-निशान नहीं

रायपुर जिले में सिर्फ 8 रेत घाटों को एनओसी मिली है, जबकि बाकी घाटों में 15 जून से पहले तक अवैध खनन होता रहा। अब घाट बंद हैं, फिर भी पारागांव, आरंग, समोदा, कुम्हारी जैसे घाटों से चोरी-छिपे खनन जारी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन जानकर भी चुप बैठा है, और खनिज विभाग इन इलाकों की जांच तक नहीं कर रहा।

क्या कहती है जनता?

लोगों का कहना है कि रेत घाटों की मॉनिटरिंग नाम की कोई चीज नहीं है। महंगे दाम चुकाकर भी उन्हें सही क्वालिटी की रेत नहीं मिल रही। प्रशासन और सरकार को इस पूरे रेत घोटाले पर सख्त एक्शन लेना चाहिए, वरना आने वाले दिनों में निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो सकता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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