
रायपुर 25 जून: आज से ठीक 49 साल पहले यानी 1975 में देश ने एक काला अध्याय देखा था — आपातकाल। इस दिन को याद करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने आज ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाया और कांग्रेस पर जमकर बरसी। इस मौके पर पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने तीखा बयान दिया और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।
चंद्राकर का तंज – ‘कांग्रेस का DNA लोकतंत्र विरोधी’
पूर्व मंत्री एवं कुरुद विधायक अजय चंद्राकर ने सीधे शब्दों में कहा कि – “आपातकाल और 1984 का सिख विरोधी दंगा, ये दोनों कांग्रेस के ताज में लगे शर्मनाक नगीने हैं। कांग्रेस के डीएनए में लोकतंत्र की हत्या, असहिष्णुता और विरोधियों का दमन कूट-कूटकर भरा है।”
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह सच्चाई जरूर जाननी चाहिए कि किस तरह से सत्ता में बने रहने के लिए नागरिक अधिकारों को कुचला गया था।
चंद्राकर ने सवाल उठाया – “1975 में आखिर ऐसा क्या हो गया था कि जनता के मूलभूत अधिकारों को निलंबित करना पड़ा? क्या सिर्फ सत्ता बचाने के लिए पूरे देश की आवाज़ दबा दी गई थी?”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज चाहे माफ़ी मांगे या न मांगे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि इतिहास गवाह है कि लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ कांग्रेस पार्टी ने किया है।
कांग्रेस नेताओं पर भी बरसे चंद्राकर
चंद्राकर यहीं नहीं रुके। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं भूपेश बघेल, डॉ. चरण दास महंत, दीपक बैज और टीएस सिंहदेव पर भी हमला बोला। कहा – “जब कांग्रेस की राजनीतिक शव यात्रा निकलेगी, तो ये चारों नेता उसे कंधा देंगे। संगति के लिए साथ देना तो बनता है।”
सचिन पायलट के बयान पर पलटवार
सचिन पायलट ने हाल ही में कांग्रेस में “अंतर्कलह नहीं है” ऐसा बयान दिया था। इस पर भी चंद्राकर ने चुटकी लेते हुए कहा – “अगर झगड़ा नहीं है, तो नेता प्रतिपक्ष लाठी किस पर चलाएंगे? हम पर चलाएंगे क्या? और किसके कहने पर पहुंच गए वहां? अब कान छिपाने के लिए कुछ तो पहनना पड़ेगा ना!”
खड़गे की रैली से बीजेपी को उम्मीद!
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर भी चंद्राकर ने तंज कसा। बोले – “वो जब रायपुर आए थे, तब कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था। फिर क्या हुआ? चुनाव में कांग्रेस हारी और बीजेपी जीती। अब फिर आएंगे, भाषण देंगे, तो हमारी जीत की राह और आसान हो जाएगी।”
बीजेपी अब कांग्रेस पर सिर्फ राजनीतिक नहीं, वैचारिक हमला बोल रही है। ‘संविधान हत्या दिवस’ का मुद्दा लेकर वो ये जताना चाहती है कि कांग्रेस का अतीत ही उसका सबसे बड़ा बोझ है। वहीं कांग्रेस इस पर सफाई देने की बजाय खामोश नजर आ रही है।
Also Read: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की शाखा कब बनी: एक ऐतिहासिक यात्रा



