
धमतरी: Dog Bite Cases in Dhamtari: शहर की हर गली-मोहल्ले में अब इंसानों से ज्यादा आवारा कुत्तों का कब्जा नजर आ रहा है। हालत ये है कि खासकर रात के वक्त लोग सड़कों से गुजरने में घबराने लगे हैं। बारिश के मौसम में ये कुत्ते और भी उग्र हो गए हैं। रोजाना किसी न किसी वार्ड से कुत्तों के काटने की खबरें सामने आ रही हैं। बीते एक साल में जिले में करीब 2000 लोग डॉग बाइट के शिकार हो चुके हैं। लेकिन नगर निगम की तरफ से कोई ठोस और असरदार कार्रवाई अभी तक नहीं दिखी है।
बधियाकरण का ठेका तो हुआ, लेकिन जगह तय नहीं!
Dhamtari News: कुत्तों की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए नगर निगम ने आखिरकार सालों बाद बधियाकरण का टेंडर तो पास किया है। हरियाणा की एक संस्था को 5 लाख रुपये में 416 कुत्तों के बधियाकरण का ठेका दिया गया है। हर कुत्ते के लिए 1200 रुपये का भुगतान होगा। वर्क ऑर्डर भी जारी हो चुका है, लेकिन अभी तक ये तय नहीं हो पाया है कि बधियाकरण कहां किया जाएगा। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया अटकी पड़ी है और लोग कुत्तों के आतंक से बेहाल हैं।
कुछ मोहल्लों में ज्यादा हावी हैं कुत्तों के झुंड
Dhamtari Dog Bite Cases: धमतरी के कई मोहल्लों में कुत्तों का आतंक ज्यादा देखने को मिल रहा है। गोलबाजार, जिला अस्पताल के आसपास, साल्हेवारापारा, सिहावा चौक, रामबाग, हटकेशर, सोरिद, आमापारा, लालबगीचा, जालमपुर और सदर रोड जैसे इलाकों में रात के समय झुंड में घूमते कुत्तों से लोग बेहद परेशान हैं। कई जगहों पर ये झुंड राह चलते लोगों पर झपट पड़ते हैं।
पागल कुत्तों ने मचाया उत्पात, इंसान से लेकर जानवर तक घायल
Dog Sterilization: कुछ घटनाएं तो और भी डराने वाली हैं। 6 दिन पहले रत्नाबांधा रोड पर एक पागल कुत्ता लगातार लोगों को काटने दौड़ रहा था। उसने एक बच्चे को खरोंच भी दिया, जिसे देखकर गुस्साए लोगों ने उसे घेरकर मार डाला। वहीं, हटकेशर वार्ड की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में कुत्ते के काटने से एक गाय पागल हो गई, जिसने 6 लोगों को घायल कर दिया। शुक्र है कि समय पर इलाज मिल गया। बीते शुक्रवार की रात बनियापारा इलाके में एक युवक को आवारा कुत्ते ने काट लिया।
डॉग हाउस की योजना 10 साल से कागजों में, न फंड मिला न जमीन
Dog House Plan: कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम बीते 10 सालों से डॉग हाउस बनाने की बात तो कर रहा है, लेकिन आज तक फंड पास नहीं हुआ और न ही जमीन तय की गई। पूर्व महापौर अर्चना चौबे के कार्यकाल में कुछ जगहों का सर्वे तो जरूर हुआ था, लेकिन फाइलें आज भी दफ्तर में धूल फांक रही हैं।
जब प्रशासन न संभाला, तो युवाओं ने उठाई जिम्मेदारी
शहर के कुछ युवाओं ने खुद आगे आकर इस समस्या से लड़ने का बीड़ा उठाया है। डॉग्स कैचर फाउंडेशन नाम की संस्था पिछले 5 सालों से सक्रिय है। संस्था ने अब तक 163 आवारा कुत्तों का बधियाकरण कराया है। पिछले हफ्ते ही एक कैंप लगाकर 23 कुत्तों का ऑपरेशन किया गया। संस्था घायल कुत्तों का इलाज, देखभाल और भोजन तक की व्यवस्था भी करती है। संस्था के प्रिंस जैन बताते हैं कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हादसों की संख्या और बढ़ेगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
निलेश लुनिया, स्वास्थ्य विभाग प्रभारी, नगर निगम
“ठेका दे दिया गया है। दो बाड़ों में अस्थायी व्यवस्था बनाई जा रही है। कुत्तों को पकड़कर वहीं ऑपरेशन के बाद वापस उसी जगह छोड़ा जाएगा। डॉग हाउस के लिए भी प्रस्ताव तैयार हो चुका है।”



