Durg Conversion Case: दुर्ग धर्मांतरण मामला: अब आदिवासी युवतियों ने बजरंग दल और ज्योति शर्मा पर लगाए गंभीर आरोप, बोले – हमारे साथ हुई अश्लील हरकतें

नारायणपुर:Durg Conversion Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित दुर्ग धर्मांतरण केस में अब नया मोड़ आ गया है। नारायणपुर की जिन तीन आदिवासी युवतियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन में कथित धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में रोका गया था, उन्होंने अब बजरंग दल और सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा पर सीधे-सीधे शारीरिक उत्पीड़न और अश्लील हरकतों का आरोप लगाया है। इन युवतियों ने नारायणपुर एसपी ऑफिस में पहुंचकर FIR दर्ज करने की मांग की है। साथ में उनके माता-पिता और रिश्तेदार भी मौजूद थे। हालांकि, शिकायत की पावती अब तक नहीं दी गई है।

Nun Arrest Case Update: 25 जुलाई 2025 की दोपहर को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर अचानक अफरा-तफरी मच गई। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने वहां मौजूद तीन आदिवासी लड़कियों, एक युवक और दो कैथोलिक ननों को रोक लिया। उनका आरोप था कि ये सभी लोग मानव तस्करी के एक बड़े रैकेट से जुड़े हैं।

युवतियों का आरोप – “हमें मारा, गालियां दी गईं और शरीर के निजी अंगों में छेड़छाड़ की गई”

तीनों युवतियों ने कहा कि वे खुद की मर्जी से काम के लिए जा रही थीं। इसी दौरान दुर्ग स्टेशन पर उन्हें बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रोका। युवतियों का आरोप है कि मौके पर मौजूद ज्योति शर्मा के सामने ही उन्हें पीटा गया, उनके शरीर के निजी हिस्सों में छुआ गया और गालियां दी गईं।

एक युवती ने पत्रकारों के सामने रोते हुए कहा,

“हमें जबरदस्ती रोका गया। मारपीट की गई, अपशब्द कहे गए। हमारे साथ जो हुआ, वो शर्मनाक था। अब हमें इंसाफ चाहिए।”

परिजनों की पीड़ा – “बेटियों को बदनाम किया, गरिमा को कुचला गया”

युवतियों के माता-पिता भी बेहद आक्रोशित नजर आए। एक पीड़िता की मां ने कहा –

“हमारे परिवार की इज्जत को सरेआम तार-तार किया गया। हमारी बेटियों को झूठे आरोप में फंसाया गया। उनसे बदतमीजी की गई। हम चाहते हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।”

NIA कोर्ट से मिली जमानत को बताया ‘सच की जीत’

पीड़ित पक्ष ने यह भी कहा कि NIA कोर्ट ने आरोपी नन और युवक को जमानत दे दी है, जो यह साबित करता है कि पूरा मामला राजनीति से प्रेरित और झूठा था। उन्होंने इसे “सत्य की जीत” बताया और दोहराया कि वे किसी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं थीं।

पुलिस की चुप्पी पर सवाल

हालांकि युवतियों ने पुलिस को लिखित शिकायत सौंप दी है, लेकिन अब तक उन्हें FIR की पावती नहीं दी गई है। परिजनों ने सवाल उठाया कि पुलिस ऐसे गंभीर मामले में कितनी गंभीरता और निष्पक्षता से जांच करेगी?

धर्मांतरण से आगे बढ़ा मामला, अब महिलाओं की गरिमा और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई

दुर्ग धर्मांतरण केस अब सिर्फ धार्मिक पहचान का मुद्दा नहीं रहा। ये अब महिलाओं की गरिमा, आदिवासी समुदाय के अधिकार और सत्ता की राजनीतिक रोटियों से जुड़ गया है। अब निगाह इस बात पर टिकी है कि क्या पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी या ये मामला भी धर्म और राजनीति की भीड़ में गुम हो जाएगा?

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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