
Dhamtari Reservoir Fish Farming: धमतरी जिले में जलाशयों में चल रहे मछली पालन को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने मत्स्य विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में विस्तृत और ताजा जवाब शपथपत्र के रूप में दाखिल करें।
लाभार्थियों ने जताई सहमति, मांगा मुआवजा
Chhattisgarh High Court Order: सुनवाई के दौरान मत्स्य विभाग की ओर से दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि जलाशय क्षेत्र में लगे पिंजरों को स्थानांतरित करने के लिए लाभार्थी किसानों ने स्वयं आवेदन दिया है। उन्होंने कलेक्टर धमतरी के समक्ष अपनी सहमति दी है, साथ ही पिंजरे हटाने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की भी मांग की है।

विभाग के सहायक निदेशक (मत्स्य) ने 24 फरवरी 2025 को जल प्रबंधन संभाग रुद्री के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखकर नए स्थान के चयन का अनुरोध किया था, लेकिन अभियंता की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। यह मामला निदेशक (मत्स्य पालन) तक भेजा जा चुका है।
मानसून बना बाधा, 774 पिंजरों का स्थानांतरण अब भी लंबित
Fisheries Department Affidavit: फुटाहामुड़ा क्षेत्र में वर्तमान में 774 पिंजरे लगे हैं, जो एक आर्द्रभूमि क्षेत्र में स्थित है। शपथपत्र में कहा गया है कि अधिकांश किसानों ने स्थानांतरण पर सहमति दे दी है, लेकिन मानसून के कारण फिलहाल पिंजरों को हटाया नहीं जा सका है। जैसे ही सिंचाई विभाग उपयुक्त वैकल्पिक स्थान चिन्हित करता है, पिंजरों का स्थानांतरण कर दिया जाएगा।

याचिकाकर्ता का दावा – अभी भी हो रही अवैध गतिविधि
Environmental Impact Reservoir: याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद जलाशय में मछली पकड़ने की गतिविधियां अब भी जारी हैं, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
राज्य का पक्ष – जलाशय में कोई अवैध गतिविधि नहीं
Footahmuda Wetland Issue: इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि फिलहाल जलाशय में कोई गतिविधि नहीं हो रही है और विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है।
अगली सुनवाई से पहले मांगा विस्तृत जवाब
Fish Farming Ban Violation: कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मत्स्य विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में एक नया और विस्तृत शपथपत्र दाखिल करें, ताकि स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
जल, जंगल, जमीन को लेकर अब कोर्ट सख्त
Court Directive to Fisheries Secretary: इस पूरे मामले से एक बात तो साफ है—अब सरकार की योजनाओं की मॉनिटरिंग सिर्फ कागज़ों में नहीं, बल्कि न्यायालय की निगरानी में हो रही है। जल संसाधनों और पर्यावरण संतुलन जैसे विषयों पर यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो आने वाले वक्त में इसका नुकसान सभी को भुगतना पड़ेगा।
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