
रायपुर: देशभर में इन दिनों वोटर लिस्ट गड़बड़ी और वोट चोरी को लेकर बहस जोरों पर है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जहां बीजेपी पर चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया, वहीं अब इस मसले पर छत्तीसगढ़ की राजनीति भी उबाल पर है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कुरुद विधानसभा में फर्जी वोटिंग का आरोप लगाते हुए बीजेपी पर निशाना साधा।
‘वोट चोरी’ का आरोप, राहुल गांधी के बयान का समर्थन
Kurud Assembly voter list: भूपेश बघेल ने कहा कि कुरुद में कुछ ऐसे वोटर्स हैं जिनके नाम दो-दो जगह दर्ज हैं। यानी एक व्यक्ति रायपुर या अभनपुर में रह रहा है, लेकिन वोट डालने का हक कुरुद में भी बना हुआ है। उन्होंने इसे वोट चोरी की साज़िश बताते हुए कहा कि ऐसी गड़बड़ी पूरे प्रदेश में फैली है।
उन्होंने राहुल गांधी के पांच बिंदुओं वाले बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जो बातें राहुल ने देशभर के लिए कहीं, वो छत्तीसगढ़ में भी लागू हो रही हैं। भूपेश के मुताबिक, “ये बीजेपी का पुराना खेल है। जब वो सत्ता में होती है, तो ऐसी गड़बड़ियां आम हो जाती हैं।”
क्या कहा था भूपेश बघेल ने?
बिलासपुर से सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए उन्हें ‘फर्जी गांधी’ कहा था। इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जवाब दिया। बघेल ने कहा कि कुरुद विधानसभा के एक मतदाता ने भी ऐसी ही शिकायत की है। जिस तरह से दूसरे राज्यों में वोट चोरी के आरोप सामने आए हैं, उसी तरह छत्तीसगढ़ में भी वोट चोरी हुई है। यह सब भारतीय जनता पार्टी की रणनीति का हिस्सा है। वे सत्ता में हैं, सवाल तो उन्हीं से पूछा जाएगा, जवाब भी निर्वाचन आयोग को देना होगा।
अजय चंद्राकर ने मांगा पूरे प्रदेश में SIR
Demand for SIR in Chhattisgarh: भूपेश बघेल के इस बयान पर कुरुद से भाजपा के फायरब्रांड नेता विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अगर भूपेश बघेल को कुरुद की मतदाता सूची में गड़बड़ी दिख रही है, तो बिहार की तरफ ही छत्तीसगढ़ के पूरे सूची का गहन पुनरीक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने पुरे प्रदेश में SIR (Special Intensive Revision) कराने की मांग करें। भूपेश बघेल को भी इसका समर्थन करना चाहिए”
अजय चंद्राकर बोले,
“अगर गड़बड़ी है तो उसका हल सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि वैधानिक प्रक्रिया है। भूपेश बघेल को बतौर कांग्रेस राष्ट्रीय पदाधिकारी, निर्वाचन आयोग में शपथपत्र देकर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।”
कांग्रेस की संगठन क्षमता पर सवाल
चंद्राकर ने कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिहार में बूथ लेवल एजेंट तक ठीक से तैनात नहीं कर पाई, फिर इतनी बड़ी जांच प्रक्रिया में वो कैसे भाग लेगी?
उन्होंने आगे कहा,
“कांग्रेस खुद वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही है और न ही आयोग को कोई जवाब दे रही है। सिर्फ मीडिया में आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। अगर भूपेश बघेल को सच में गड़बड़ी की चिंता है, तो आधिकारिक आपत्ति दर्ज करें।”
तोखन साहू पर पलटवार करते हुए बघेल ने कहा,
“इस मसले पर चुनाव आयोग कुछ नहीं बोल रहा, लेकिन तोखन साहू को बेचैनी हो रही है। आखिर क्यों? वो सीधा जवाब देने की बजाय इधर-उधर की बातें कर रहे हैं। उन्हें असली-नकली की बहस में नहीं पड़ना चाहिए, जो सवाल पूछा जा रहा है, उसी का जवाब दें।”
वोट चोरी का आरोप या महज बयानबाज़ी?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा कुरुद विधानसभा क्षेत्र में वोट चोरी का जो आरोप लगाया गया है, उस पर सियासत तेज़ हो गई है। लेकिन सवाल ये है कि क्या उनके पास इस आरोप को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत है?
दरअसल, भूपेश बघेल ने खुद माना है कि यह जानकारी उन्हें कुरुद के एक युवक ने दी है। मतलब ये कि पूरी बात सिर्फ सुनने-सुनाने तक सीमित है, जिस पर कांग्रेस नेता मीडिया में बयानबाज़ी कर रहे हैं।
बिना प्रमाण के गंभीर आरोप
चुनाव जैसे गंभीर मसले पर जब इस तरह के आरोप लगाए जाते हैं, तो उनसे पहले साक्ष्य की ज़रूरत होती है। लेकिन बघेल के बयान से साफ है कि उनके पास कोई दस्तावेज़ी प्रमाण या आधिकारिक शिकायत मौजूद नहीं है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है, जिससे माहौल बनाया जा सके?
मीडिया के ज़रिए राजनीति?
भूपेश बघेल और कांग्रेस की रणनीति अब सीधे तौर पर मीडिया बयानों पर केंद्रित दिख रही है। जब उनके पास न तो कोई निर्वाचन आयोग को दी गई आपत्ति है, न ही किसी मंच पर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट, तब यह सिर्फ कैमरे के सामने की राजनीति बन जाती है।
जनता को गुमराह करने की कोशिश?
इस तरह के आरोपों से न सिर्फ लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठता है, बल्कि आम जनता के बीच भी भ्रम की स्थिति बनती है।
यदि सच में गड़बड़ी है, तो कांग्रेस को चाहिए कि वह आधिकारिक रूप से निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज करे और जांच की मांग करे, न कि मीडिया में बिना आधार के सनसनी फैलाए।
बिना प्रमाण और प्रक्रिया के सिर्फ आरोप लगाना विपक्ष की कमजोर रणनीति को दिखाता है। ऐसे गंभीर मामलों में सियासत से ज्यादा ज़िम्मेदारी की ज़रूरत होती है, क्योंकि लोकतंत्र का आधार जनता का भरोसा होता है – और उसे खोना किसी भी पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
मतदाता सूची की जांच पर अब राजनीति तेज
Congress-BJP controversy: वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी सड़क से सदन तक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, वहीं बीजेपी इसे राजनीतिक नौटंकी कह रही है।



