
Strike by government employees: छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों का कामकाज आज यानी 22 अगस्त को थमने वाला है। राज्यभर के सरकारी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और हड़ताल करेंगे। यह हड़ताल छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले की जा रही है। फेडरेशन ने कर्मचारियों और पेंशनरों की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है।
राज्यभर में असर, दफ्तरों का काम ठप
इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, नगरीय निकाय, महिला एवं बाल विकास सहित कई विभागों के कर्मचारी इसमें शामिल होंगे। इससे सरकारी दफ्तरों का काम प्रभावित रहेगा और आम लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें
फेडरेशन ने सरकार के सामने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कुल 11 बड़ी मांगें रखी हैं। इनमें सबसे अहम केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता (DA) लागू करना शामिल है।
1. महंगाई भत्ता और एरियर्स
- कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र सरकार के बराबर DA लागू किया जाए।
- DA के एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में जोड़ी जाए।
2. वेतनमान और वेतन विसंगतियां
- सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
- लिपिकों, शिक्षकों, स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग जैसे संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
3. सेवा लाभ और पदोन्नति
- कर्मचारियों को पहली नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए संपूर्ण सेवा लाभ दिया जाए।
- पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए।
- सहायक शिक्षक और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान मिले।
- नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन और समयबद्ध पदोन्नति दी जाए।
4. अन्य अहम मांगें
- अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10 प्रतिशत की सीमा को शिथिल किया जाए।
- पूरे प्रदेश में कैशलेश सुविधा लागू की जाए।
- अर्जित अवकाश का नगदीकरण 300 दिन तक किया जाए।
- दैनिक, अनियमित और संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
क्यों बढ़ा कर्मचारियों का असंतोष
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से वे इन मांगों को उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए। खासतौर पर महंगाई भत्ते और वेतन विसंगति को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है। यही वजह है कि अब सभी विभागों ने एकजुट होकर हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
सरकार पर दबाव
इस हड़ताल से सरकार पर दबाव बढ़ना तय है। अगर मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो कर्मचारी आंदोलन को और आगे बढ़ाने की चेतावनी भी दे सकते हैं। फिलहाल राज्यभर में हजारों कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहकर सरकार से अपने हक की मांग उठा रहे हैं।



