
रायपुर: CG Govt Job Bharti: छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी से त्रस्त युवा अब चरम कदम उठाने की चेतावनी दे रहे हैं। मामला छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स (CAF) 2018 भर्ती परीक्षा का है। इस परीक्षा में पास हुए 417 अभ्यर्थियों को आज तक नियुक्ति नहीं मिली, जिससे उनका गुस्सा फूट पड़ा है। निराश युवाओं ने अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर गुहार लगाई है।
8 साल बाद भी जॉइनिंग नहीं
CG Arms Force Bharti: 2018 में CAF की भर्ती परीक्षा हुई थी। इसमें 1786 पदों पर विज्ञापन निकला था। मेरिट लिस्ट और वेटिंग लिस्ट दोनों जारी हुई थीं।
- मेरिट लिस्ट के उम्मीदवारों की नियुक्ति हो गई,
- लेकिन वेटिंग लिस्ट के 417 अभ्यर्थी आज भी दर-दर भटक रहे हैं।
CG Arms Force Joining Update: युवाओं का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार उनकी नियुक्ति को नजरअंदाज कर रही है।
शाह को लिखी चिट्ठी
नाराज उम्मीदवारों ने अमित शाह को भेजी चिट्ठी में लिखा है:
“एक तरफ सरकार नक्सलियों को सरेंडर करने पर नौकरी, जमीन, मकान और आर्थिक सहायता देती है। वहीं हम, जो भर्ती परीक्षा पास कर चुके हैं, 8 साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। अगर नौकरी नहीं मिली, तो मजबूरन हमें भी नक्सलवाद का रास्ता अपनाना पड़ेगा।”
सत्ता बदलती रही, पर हल नहीं मिला
- 2018 में परीक्षा रमन सिंह सरकार के दौरान कराई गई थी।
- उसके बाद कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार आई, लेकिन CAF भर्ती वेटिंग लिस्ट पर ध्यान नहीं दिया गया।
- अब 2023 में भाजपा की सरकार फिर से सत्ता में है, लेकिन स्थिति जस की तस है।
युवाओं का आरोप है कि मौजूदा गृहमंत्री विजय शर्मा केवल आश्वासन दे रहे हैं, जबकि सरकार बजट की कमी का बहाना बनाकर नियुक्ति टाल रही है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा—
“भाजपा ने रोजगार देने का वादा किया था, अब उसे निभाना चाहिए। बेरोजगार युवाओं की नक्सलवाद अपनाने की चेतावनी बेहद चिंताजनक है।”
CAF में अब भी 3326 पद खाली
जानकारी के मुताबिक, फिलहाल CAF में 3326 पद खाली हैं।
- कई चयनित उम्मीदवार मेडिकल में फेल हो गए या दूसरी नौकरी मिलने पर पद छोड़ चुके हैं।
- बावजूद इसके वेटिंग लिस्ट के 417 युवाओं को मौका नहीं दिया गया।
- इनमें से ज्यादातर अब ओवरएज हो चुके हैं, खासकर दुर्ग संभाग के उम्मीदवार बड़ी संख्या में प्रभावित हैं।
यह मामला अब सिर्फ रोजगार का नहीं, बल्कि युवाओं के धैर्य और भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है। सरकार को जल्द निर्णय लेना होगा, वरना इसकी कीमत सामाजिक और सुरक्षा दोनों स्तर पर भारी पड़ सकती है।



