छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल की NIA जांच शुरू, 500 से ज्यादा मोबाइल एप यूज करते थे दोनों नाबालिग

छत्तीसगढ़ के रायपुर और दुर्ग में आतंकी संगठन ISIS के पाकिस्तानी मॉड्यूल से जुड़े दो नाबालिगों का मामला अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के पास चला गया है। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की शुरुआती पूछताछ में दोनों नाबालिगों के कई विदेशी संपर्कों का खुलासा हुआ है। अब NIA ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और दोनों नाबालिगों से विस्तार से पूछताछ की जा रही है, ताकि इस मॉड्यूल के पूरे नेटवर्क को समझा जा सके।

व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप के सदस्यों को भी बुलाया गया बयान के लिए

NIA अब केवल नाबालिगों पर ही नहीं, बल्कि उनके सोशल मीडिया नेटवर्क पर भी फोकस कर रही है। नाबालिगों के साथ व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप में जुड़े अन्य लोगों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा रहा है। जिन लोगों से पूछताछ की जा रही है, उनमें 18 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियां शामिल हैं। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि क्या ये लोग भी किसी तरह से आतंकी गतिविधियों में शामिल थे या उन्हें बरगलाया जा रहा था।

दो साल की कॉल डिटेल्स और परिजनों के मोबाइल की हो रही जांच

जांच को पुख्ता बनाने के लिए, दोनों नाबालिगों की दो साल पुरानी कॉल डिटेल्स को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही, उनके परिजनों के मोबाइल फोन की भी विस्तार से जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या परिवार का कोई सदस्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन गतिविधियों में शामिल था या उन्हें इन देश विरोधी गतिविधियों की जानकारी थी।

ISIS आतंकवादियों ने किया था दोनों छात्रों का ब्रेनवॉश

ATS अधिकारियों ने पूछताछ के बाद यह जानकारी दी है कि ISIS के आतंकवादियों ने दोनों नाबालिगों को पूरी तरह से ब्रेनवॉश कर दिया था। दोनों छात्रों की गतिविधियां स्पष्ट रूप से देश विरोधी थीं। वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके न केवल देश की कई सरकारी योजनाओं की आलोचना कर रहे थे, बल्कि अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को भी बढ़ावा दे रहे थे।

देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को जोड़ने की थी कोशिश

ये दोनों नाबालिग छात्र केवल खुद ही आतंकी विचारधारा से प्रभावित नहीं थे, बल्कि वे अन्य युवा लड़के-लड़कियों को अपने मॉड्यूल में जोड़ने की भी सक्रिय कोशिश कर रहे थे। वे ऐसे लोगों की तलाश में जुटे हुए थे जो पहले से ही किसी न किसी तरह से देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे या जिनकी मानसिकता को आसानी से बदला जा सके। यह दिखाता है कि उनका उद्देश्य एक छोटा नेटवर्क तैयार करना था।

500 से अधिक मोबाइल एप्लिकेशन का कर रहे थे इस्तेमाल

गिरफ्तार किए गए दोनों नाबालिगों से पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वे 500 से भी ज्यादा मोबाइल एप्लिकेशन (Mobile Apps) का इस्तेमाल कर रहे थे। इतने बड़े पैमाने पर ऐप्स का उपयोग साक्ष्य छिपाने और सुरक्षित संचार (Encrypted Communication) स्थापित करने की उनकी कोशिशों को दर्शाता है। वे अपने अकाउंट्स के जरिए ऐसे वीडियो भी शेयर करते थे जो कट्टरता को बढ़ावा देते थे और देश विरोधी सामग्री से भरे हुए थे।

बैकग्राउंड और विदेशी कनेक्शन की तलाश

जांच एजेंसी अब दोनों नाबालिगों के शैक्षणिक और सामाजिक बैकग्राउंड की गहराई से जांच कर रही है। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे किन लोगों से मिलते-जुलते थे और उनका मार्गदर्शन कौन कर रहा था। ATS की शुरुआती पूछताछ में सामने आए कई देशों से संपर्क के खुलासे को लेकर NIA अब विदेशी खुफिया एजेंसियों की मदद से इन अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों की भी पुष्टि करने में जुटी है।

आतंकी नेटवर्क के बड़े खिलाड़ियों की पहचान पर जोर

इस पूरे मामले की जांच का अंतिम लक्ष्य केवल नाबालिगों को पकड़ना नहीं है, बल्कि ISIS मॉड्यूल के उन बड़े खिलाड़ियों और हैंडलरों की पहचान करना है जो उन्हें दूर बैठकर निर्देशित कर रहे थे। NIA को उम्मीद है कि कॉल डिटेल्स, सोशल मीडिया लिंक्स और विदेशी संपर्कों की गहन जांच से इस आतंकी नेटवर्क के भारतीय और पाकिस्तानी हैंडलरों तक पहुंचा जा सकेगा, जिन्होंने इन छात्रों को देश के खिलाफ भड़काने का काम किया।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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