7 दिसंबर को रायपुर में बड़ा प्रदर्शन, वीरेंद्र सिंह तोमर के समर्थन में लाखों लोगों को जुटाने का दावा

बिलासपुर दौरे पर पहुंचे करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने छत्तीसगढ़ पुलिस के खिलाफ बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने का दावा किया है। उन्होंने शहर में क्षत्रिय समाज की एक बड़ी बैठक ली और ऐलान किया कि 7 दिसंबर को रायपुर में देशभर से लाखों लोग एकजुट होकर जबरदस्त प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से वीरेंद्र सिंह तोमर के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित अभद्रता और बर्बरता के विरोध में होगा, जिसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

पुलिस पर गंभीर आरोप: कपड़े उतरवाने और बेरहमी से पीटने का दावा

डॉ. शेखावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस पर सबसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस हिरासत (कस्टडी) के दौरान वीरेंद्र सिंह तोमर के भाई की पत्नी के साथ भी गंभीर अभद्रता हुई और पुलिसकर्मियों ने उनके कपड़े उतरवाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने वीरेंद्र सिंह तोमर को बेरहमी से नंगे पांव बाजार में घुमाया, उन पर पैर रखकर उठाया और पानी मांगने पर भी पानी नहीं दिया। करणी सेना ने इन कृत्यों को मानवाधिकार और संविधान का खुला उल्लंघन बताया है।

मानवाधिकार उल्लंघन पर पुलिस प्रशासन सवालों के घेरे में

करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शेखावत ने थाने के प्रभारी योगेश कश्यप पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले को पुलिस की एकतरफा कार्रवाई का प्रतीक बताया। उनका स्पष्ट कहना था कि भले ही वीरेंद्र सिंह तोमर पर अवैध वसूली या मारपीट जैसे आरोप दर्ज हों (जैसा कि पुलिस रिकॉर्ड में है), लेकिन पुलिस की कथित ज्यादती और बर्बरता एक अलग और गंभीर मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि करणी सेना उसी भाषा में जवाब देगी जिस भाषा में उनसे बात की जाएगी, और यह पुलिस प्रशासन पर सवालों की झड़ी लगा चुका है।

‘आर-पार की लड़ाई’: संविधान के दायरे में ही होनी चाहिए कार्रवाई

डॉ. शेखावत ने मीडिया से चर्चा के दौरान यह स्पष्ट किया कि संगठन न्यायपालिका के निर्णय को मानेगा, क्योंकि आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पुलिस की बर्बरता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “जो संविधान में रहेगा, वह हमारा… और जो संविधान से बाहर जाएगा, उसे करणी सेना जवाब देना जानती है।” यह बयान यह दर्शाता है कि 7 दिसंबर को होने वाला विरोध प्रदर्शन आर-पार की लड़ाई की तरह होगा, जहां संगठन पुलिस की कथित ज्यादतियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग करेगा।

पुलिस रिकॉर्ड: आरोपी ‘सूदखोर’ के नाम से भी थे चर्चित

इस पूरे विवाद का दूसरा पक्ष पुलिस रिकॉर्ड है। पुलिस के अनुसार, आरोपी वीरेंद्र सिंह तोमर पर अवैध वसूली, मारपीट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। उन्हें स्थानीय रूप से ‘सूदखोर वीरेंद्र तोमर’ के नाम से भी जाना जाता है। करणी सेना भले ही आरोपों को स्वीकार न करे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई का आधार यही आपराधिक रिकॉर्ड है। हालांकि, शेखावत ने साफ किया कि पुलिस की कथित बर्बरता, आरोप दर्ज होने के बावजूद, मानवाधिकारों का उल्लंघन है और यह पुलिस की शक्तियों के दुरुपयोग का मामला है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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