
रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। साल 2025 के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। राज्य में दो दर्जन से ज्यादा दवाओं के सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह रिपोर्ट तब आई, जब इन दवाओं के बैच अस्पतालों में सप्लाई हो चुके थे और बड़ी संख्या में मरीज इनका सेवन भी कर चुके थे। इन दवाओं में बच्चों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक से लेकर गर्भवती महिलाओं की जरूरी दवाएं तक शामिल थीं। जांच में पता चला कि कुछ दवाओं में जरूरी सॉल्ट की मात्रा मानक से बहुत कम थी, वहीं कुछ के गंभीर साइड इफेक्ट भी सामने आए हैं।
स्थानीय उद्योग को बढ़ावा या बीमारी को न्योता? नियमों की आड़ में फल-फूल रहा घटिया दवाओं का कारोबार
फॉर्मा सेक्टर को बढ़ावा देने के नाम पर पिछली सरकार ने जो नियम बनाए थे, वे अब प्रदेश की जनता के लिए मुसीबत बन गए हैं। स्थानीय कंपनियों को टेंडर में भारी छूट दी गई थी, जिसमें सबसे प्रमुख रियायत यह थी कि कंपनियां बिना WHO-GMP (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन – गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) सर्टिफिकेट के भी टेंडर भर सकती हैं। इसी नियम का फायदा उठाकर 9M जैसी कंपनियां करोड़ों की दवाएं सप्लाई कर रही हैं। मौजूदा सरकार ने भी इन नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं की सप्लाई बेरोकटोक जारी है।
MSME के नाम पर करोड़ों का टर्नओवर: नियम के मुताबिक ब्लैकलिस्ट होने के बजाय मिल रहे नए ऑर्डर
सरकारी नियमों के मुताबिक, यदि किसी कंपनी की दवाओं के 5 बैच गुणवत्ता में फेल होते हैं, तो उसे 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) के अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। 9M कंपनी, जिसने पिछले 4 सालों में करोड़ों का टर्नओवर कर लिया है, उसे आज भी MSME मानकर छूट दी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय अधिकारी उसे फेल दवाओं को बदलकर नया बैच सप्लाई करने का निर्देश दे रहे हैं।
फेल हुई दवाओं की सूची और उनके उपयोग: इन दवाओं ने बढ़ाई मरीजों की मुश्किल
जांच में जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, वे रोजमर्रा की बीमारियों से लेकर गंभीर ऑपरेशनों तक में इस्तेमाल होती हैं। नीचे दी गई तालिका में उन दवाओं और उनके उपयोग को समझा जा सकता है:
| दवा का नाम | मुख्य इस्तेमाल |
| टैबलेट टेलमीसार्टेन | ब्लड प्रेशर (BP) नियंत्रित करने के लिए |
| टैबलेट क्लोरफेनिरामाइन | एलर्जी रोकने के लिए (एंटी-एलर्जिक) |
| इंजेक्शन जेंटामाइसिन | बैक्टीरिया के संक्रमण को रोकने हेतु |
| इंजेक्शन फाइटोनाडियोन | ब्लीडिंग (रक्तस्राव) रोकने के लिए |
| इंजेक्शन ओन्डेन्सेट्रॉन | उल्टी रोकने के लिए |
| सिरप लेवोसल्बुटामोल | खांसी और सांस की समस्या में |
| टैबलेट ड्राइसाइक्लोमिन | पेट दर्द से राहत के लिए |
| क्रीम मिकोनाजोल नाइट्रेट | फंगल इन्फेक्शन के इलाज में |
ऑपरेशन के औजारों में जंग और गर्भपात का खतरा: दवाओं की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
अस्पतालों से यह भी शिकायत मिली है कि सप्लाई किए गए सर्जिकल औजारों में जंग लगा हुआ था। 9M कंपनी द्वारा सप्लाई की गई गर्भवती महिलाओं की दवाओं को लेकर विशेषज्ञ सबसे ज्यादा चिंतित हैं। इन दवाओं की खराब गुणवत्ता से गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता था या गर्भपात की नौबत आ सकती थी। भारी विरोध और शिकायतों के बाद अब सीजीएमएससी ने इन दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाकर स्टॉक वापस मंगाना शुरू किया है, लेकिन तब तक हजारों मरीज इन दवाओं का सेवन कर चुके थे।
अब होगी नियमों की समीक्षा: सीजीएमएससी ने माना कि छूट का हो रहा है गलत फायदा
इस पूरे मामले पर सीजीएमएससी के एमडी रितेश अग्रवाल का कहना है कि स्थानीय कंपनियों को रियायत देने का उद्देश्य प्रदेश में उद्योग लगाना था। हालांकि, अब यह सामने आया है कि कंपनियां इन नियमों का गलत फायदा उठाकर गुणवत्ता के साथ समझौता कर रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बड़ी मात्रा में दवाओं की सप्लाई हो चुकी है और अब इन छूट वाले नियमों की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन अब नई व्यवस्था बनाने की बात कर रहा है जिसमें बिना कड़े निरीक्षण के कोई भी दवा नहीं खरीदी जाएगी।
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