
नई दिल्ली/रायपुर: दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन के ड्राइवर प्रमोद खाखा और राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के बीच हुआ विवाद अब तूल पकड़ चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पूरे मामले में संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने ड्राइवर प्रमोद खाखा को व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए दिल्ली में ही बुलाया है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री खुद ड्राइवर से मिलकर उस रात की पूरी हकीकत जानेंगे। इस बुलावे के बाद विभाग और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है क्योंकि एक साधारण कर्मचारी ने सीधे सत्ता के शीर्ष तक अपनी आवाज पहुंचाई है।
स्पीड की सनक और बदसलूकी की कहानी: क्या हुआ था 19 और 20 दिसंबर की उस काली रात को?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े दिल्ली दौरे पर थीं। ड्राइवर प्रमोद खाखा को उनकी गाड़ी चलाने की जिम्मेदारी मिली थी। मंत्री को भाजपा कार्यालय और केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के बाद रात 10 बजे किसी मॉल में जाना था। ड्राइवर का आरोप है कि वह दिल्ली के ट्रैफिक नियमों के मुताबिक 70 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे, लेकिन मंत्री उन पर 100 की रफ्तार से गाड़ी भगाने का दबाव बना रही थीं। मना करने पर मंत्री के सुरक्षाकर्मी (PSO) और निजी सहायक (PA) ने न केवल उनके साथ अभद्रता की, बल्कि उन्हें बीच रास्ते में गाड़ी से धक्का देकर उतार दिया।
20 साल का बेदाग रिकॉर्ड और जशपुर का कनेक्शन: कौन हैं निलंबित ड्राइवर प्रमोद खाखा?
प्रमोद खाखा छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के मूल निवासी हैं। उनका छत्तीसगढ़ सदन में काम करने का अनुभव काफी पुराना है। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद से वे दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले 20 सालों से अधिक समय से वे दिल्ली की सड़कों पर वीआईपी मूवमेंट को सुरक्षित संभाल रहे हैं। जशपुर का होने के नाते वे मुख्यमंत्री के गृह जिले से भी ताल्लुक रखते हैं। प्रमोद ने बताया कि वे इतने सालों से बेदाग काम कर रहे हैं और केवल नियम मानने की सजा उन्हें इस तरह से दी गई कि उन्हें नौकरी से भी हाथ धोना पड़ गया।
मीडिया की खबर का हुआ असर: ‘दक्षिण कोसल’ ने उठाया मुद्दा तो जागी न्याय की उम्मीद
इस संवेदनशील मुद्दे को जब ‘दक्षिण कोसल’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, तब जाकर यह मामला दबने के बजाय चर्चा में आया। खबर के वायरल होने और मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद अब प्रशासन बैकफुट पर है। ड्राइवर प्रमोद खाखा का कहना है कि वे मुख्यमंत्री को उस रात की हर छोटी-बड़ी बात विस्तार से बताएंगे। जिस तरह से मुख्यमंत्री ने सीधे संवाद का रास्ता चुना है, उससे संभावना जताई जा रही है कि ड्राइवर को न्याय मिलेगा और अभद्र व्यवहार करने वाले अधिकारियों या सहायकों पर कार्रवाई हो सकती है।



