
रायपुर: छत्तीसगढ़ में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय जंबूरी को लेकर सियासत गरमा गई है। संस्था के अध्यक्ष पद को लेकर दो दिग्गजों के बीच ‘पावर गेम’ शुरू हो गया है। एक तरफ सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि वे अभी भी संस्था के वैधानिक अध्यक्ष हैं और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। वहीं दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष मनोनीत कर दिया है। 13 दिसंबर 2025 की तारीख वाले इस आदेश ने विवाद को जन्म दे दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर संस्था की कमान किसके हाथ में है?
बृजमोहन अग्रवाल ने किया जंबूरी स्थगित करने का ऐलान: 10 करोड़ के घोटाले और वित्तीय गड़बड़ी का लगाया आरोप
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को राज्य परिषद के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और बालोद में होने वाली राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी को स्थगित करने का फरमान जारी कर दिया। अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि इस आयोजन के नाम पर भारी भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक स्काउट्स एंड गाइड्स की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस आयोजन को रोकना जरूरी है। अग्रवाल ने प्रेस नोट जारी कर साफ किया कि संस्था की स्वायत्तता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिना अनुमति के बदला गया आयोजन स्थल, नियम विरुद्ध हुई कार्रवाई
विवाद की एक बड़ी वजह आयोजन स्थल का बदलना भी है। बृजमोहन अग्रवाल के मुताबिक, राज्य परिषद ने पहले जंबूरी का आयोजन नया रायपुर में करने का फैसला लिया था। लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग ने परिषद की सहमति लिए बिना ही अचानक इसे बालोद के एक छोटे से कस्बे में स्थानांतरित कर दिया। बैठक में आपत्ति जताई गई कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स एक स्वतंत्र संस्था है जो अपने संविधान और रूल्स बुक से चलती है, न कि किसी विभागीय आदेश या सरकारी हस्तक्षेप से।
10 करोड़ का ‘सीधा’ खेल: स्काउट्स के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में ट्रांसफर हुई भारी-भरकम राशि
वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। सांसद अग्रवाल का दावा है कि वित्त विभाग ने जंबूरी के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। नियमानुसार यह राशि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के खाते में आनी चाहिए थी, लेकिन इसे सीधे जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बालोद के खाते में भेज दिया गया। अग्रवाल ने इसे वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन बताते हुए इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में रखा है।
बिना टेंडर खुले ही बन गया जंबूरी का मैदान: भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में निर्माण कार्य
जंबूरी स्थल पर चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि बालोद में निर्माण कार्य उस वक्त पूरे हो गए जब तक टेंडर की प्रक्रिया तक पूरी नहीं हुई थी। यह टेंडर भी स्काउट्स संस्था के बजाय शिक्षा विभाग द्वारा बुलाया गया था। बिना टेंडर काम पूरा होना सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है। इन्ही संदेहास्पद परिस्थितियों को देखते हुए राज्य परिषद ने जंबूरी को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है।
शिक्षा विभाग ने कहा ‘जंबूरी स्थगित नहीं हुई है, तय समय पर ही होगा राष्ट्रीय कैंप’
जहां एक ओर बृजमोहन अग्रवाल ने आयोजन को रद्द करने का प्रेस नोट जारी किया, वहीं स्कूल शिक्षा विभाग के अफसर अब भी कह रहे हैं कि जंबूरी स्थगित नहीं हुई है। विभाग का तर्क है कि मंत्री गजेंद्र यादव अब संस्था के पदेन अध्यक्ष हैं और उनकी देखरेख में तैयारियां जोरों पर हैं। विभाग के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 9 जनवरी से होने वाला कार्यक्रम अपने तय शेड्यूल के अनुसार ही चलेगा।

स्वतंत्र संस्था या सरकारी विभाग? स्काउट्स एंड गाइड्स के संविधान पर उठ रहे सवाल
बृजमोहन अग्रवाल खेमे का कहना है कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स एक सेवाभावी संस्था है जिसका अपना एक अनुशासनात्मक ढांचा है। शिक्षा विभाग का इसमें अत्यधिक हस्तक्षेप संस्था के उद्देश्यों के विपरीत है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि शिक्षा विभाग इसके बावजूद अपनी मर्जी से जंबूरी का आयोजन करता है, तो उसकी पूरी प्रशासनिक, आर्थिक और नैतिक जिम्मेदारी विभाग की होगी, स्काउट्स एंड गाइड्स की नहीं।
अब आगे क्या? आर-पार की लड़ाई में उलझा बच्चों का भविष्य और राज्य का सम्मान
दो बड़े नेताओं की इस लड़ाई में 15 हजार से ज्यादा उन रोवर-रेंजरों का भविष्य अधर में लटक गया है जो देश भर से छत्तीसगढ़ आने वाले हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं और दूसरी तरफ सरकार की प्रतिष्ठा का सवाल। अब देखना यह होगा कि क्या 9 जनवरी को बालोद में जंबूरी का आगाज हो पाएगा या यह आयोजन प्रशासनिक खींचतान की भेंट चढ़ जाएगा।



