
रायपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में समन्वय की कमी का बड़ा असर अब स्कूली व्यवस्था पर दिखने लगा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की अलग-अलग गाइडलाइंस ने प्रदेश के स्कूलों में परीक्षाओं का अंबार लगा दिया है। दरअसल माशिमं ने 10वीं और 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाएं और प्रोजेक्ट वर्क 1 से 20 जनवरी के बीच निपटाने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरी ओर डीपीआई ने इसी अवधि के दौरान 15 जनवरी तक प्री-बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने का फरमान जारी कर दिया है। एक ही समय में दो बड़ी परीक्षाओं के आयोजन ने स्कूलों की पूरी व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है।
टीचर्स एसोसिएशन ने जताई नाराजगी: आदेश को बताया अव्यवहारिक, कार्यदिवसों की कमी से शिक्षक परेशान
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। शिक्षक संघ का तर्क है कि व्यवहारिक रूप से एक ही समय पर प्रैक्टिकल और प्री-बोर्ड परीक्षा संपन्न कराना लगभग असंभव है। बाहरी परीक्षकों की उपलब्धता के आधार पर 5 जनवरी से प्रैक्टिकल शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही शिक्षकों को अन्य स्कूलों में भी ड्यूटी के लिए जाना होता है। ऐसे में प्री-बोर्ड परीक्षा का संचालन और कॉपियों का मूल्यांकन करने के लिए शिक्षकों के पास कार्यदिवसों का भारी अभाव हो गया है।

विद्यार्थियों और पालकों पर बढ़ा मानसिक दबाव: प्रोजेक्ट फाइल तैयार करें या प्री-बोर्ड की तैयारी, असमंजस में बच्चे
बोर्ड परीक्षा के ठीक पहले आए इस दोहरे दबाव ने छात्रों को भारी मानसिक संकट में डाल दिया है। विद्यार्थियों के सामने दुविधा यह है कि वे प्रैक्टिकल फाइलों पर ध्यान दें या फिर प्री-बोर्ड की लिखित परीक्षाओं की तैयारी करें। समय सीमा इतनी कम है कि छात्रों को रिवीजन का मौका भी नहीं मिल पा रहा है। पालकों ने भी इस व्यवस्था पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस तरह के बिना सोचे-समझे लिए गए फैसलों से बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल: बिना समन्वय के आदेशों से बिगड़ा माहौल, सर्वांगीण विकास में आ रही बाधा
शैक्षणिक सत्र के इस सबसे महत्वपूर्ण चरण में बिना किसी प्लानिंग के जारी किए गए आदेशों ने शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों पर एक साथ परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और प्रैक्टिकल अंकों को पोर्टल पर अपलोड करने का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की अव्यवस्था विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के खिलाफ है। बोर्ड परीक्षा से पहले छात्रों को एक शांत और संगठित माहौल की जरूरत होती है जो इस समय स्कूलों में गायब दिख रहा है।
शासन से तारीखों में बदलाव की अपील: शिक्षक संघ ने की समन्वय की मांग, जल्द सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
शिक्षक संगठनों ने राज्य शासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मांग है कि लोक शिक्षण संचालनालय और माध्यमिक शिक्षा मंडल आपसी चर्चा कर प्री-बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों में युक्तिसंगत संशोधन करें। इससे प्रैक्टिकल परीक्षाएं सुचारू रूप से पूरी हो सकेंगी और छात्रों को भी बेवजह के मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी। सभी पक्षकारों को अब सरकार के अगले कदम का इंतजार है ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई सकारात्मक फैसला लिया जा सके।



