
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ही कई इलाकों में बिजली बिल अधिक आने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। उपभोक्ताओं के मन में मीटर की सटीकता को लेकर गहरा संदेह बना हुआ है जिसे दूर करने के लिए अब एक नई व्यवस्था सामने आई है। यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसका मीटर तेज चल रहा है तो वह बिजली विभाग में आवेदन देकर चेक मीटर लगवा सकता है। रायपुर के एक जागरूक नागरिक की शिकायत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया है जिससे अब आम जनता को अपनी शंका दूर करने का एक कानूनी रास्ता मिल गया है।
पूर्व प्राध्यापक ने मांगी टेस्टिंग रिपोर्ट
डीडी नगर के कंचनगंगा फेस-2 में रहने वाले सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक घनाराम साहू ने अपने घर में लगे स्मार्ट मीटर की तकनीकी रिपोर्ट मांगी थी। उन्होंने विभाग को पत्र लिखकर तर्क दिया कि स्मार्ट मीटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है और इसकी आपूर्ति के समय जो तकनीकी प्रमाण पत्र तैयार किया गया था उसे उपभोक्ता को भी दिखाया जाना चाहिए। विभाग के अधिकारियों ने जब उनकी इस मांग को अनसुना कर दिया और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो उन्होंने हार मानने के बजाय बिजली कंपनी के शिकायत निवारण फोरम का दरवाजा खटखटाया।

फोरम ने अधिकारियों को लगाई फटकार
बिजली कंपनी के शिकायत निवारण फोरम ने इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए बिजली विभाग के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। फोरम ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उपभोक्ताओं को उनके घर में लगे उपकरणों की शुद्धता की रिपोर्ट पाने का पूरा अधिकार है और विभाग इसमें आनाकानी नहीं कर सकता। फोरम के कड़े रुख और दखल के बाद ही विभाग ने पूर्व प्राध्यापक को उनके मीटर की टेस्टिंग रिपोर्ट उपलब्ध कराई। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि विभाग को अब उपभोक्ताओं की तकनीकी शिकायतों को गंभीरता से लेना होगा।
तीन महीने तक होगा मीटर का निरीक्षण
SOLUTION: इस सुनवाई के बाद विभाग की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि यदि किसी भी उपभोक्ता को अपने स्मार्ट मीटर पर भरोसा नहीं है तो वह संबंधित दफ्तर में शिकायत दर्ज करा सकता है। ऐसी स्थिति में विभाग उपभोक्ता के परिसर में एक अतिरिक्त चेक मीटर लगाएगा जिसे तीन महीने तक निगरानी में रखा जाएगा। इस समय सीमा के दौरान पुराने और नए मीटर की रीडिंग का मिलान किया जाएगा और यदि कोई तकनीकी खामी साबित होती है तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा। यह समाधान उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है जो गलत बिलिंग की आशंका से घिरे हुए हैं।
उपभोक्ताओं के अधिकारों की जीत
यह पूरा मामला बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की जागरूकता को दर्शाता है जो केवल बिल का भुगतान ही नहीं बल्कि सेवा में पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। पूर्व प्राध्यापक साहू का कहना है कि जब कोई उपकरण हमारे घर में लगता है तो उसकी गुणवत्ता का प्रमाण पत्र देना विभाग की जिम्मेदारी है। अब फोरम के इस हस्तक्षेप के बाद विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा ताकि जनता का भरोसा स्मार्ट मीटर की नई तकनीक पर बना रहे। इस फैसले ने यह नजीर पेश की है कि जागरूक उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए लड़कर व्यवस्था में सुधार ला सकते हैं।



