
छत्तीसगढ़ के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज के 600 से ज्यादा छात्र अपनी बदहाली को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। यूजी और पीजी के ये छात्र पिछले छह दिनों से लगातार हड़ताल कर रहे हैं। गुरुवार को विरोध का स्तर और बढ़ गया जब छात्रों ने कॉलेज कैंपस से लेकर जेल रोड तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान छात्रों ने शासन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है जिससे अब उनके सब्र का बांध टूट गया है।
स्टाइपेंड में भेदभाव से नाराज हैं छात्र
हड़ताल कर रहे छात्रों का सबसे बड़ा आरोप स्टाइपेंड में हो रहे भेदभाव को लेकर है। छात्रों के अनुसार साल 2019 में मेडिकल की लगभग सभी शाखाओं के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की गई थी लेकिन डेंटल छात्रों को इससे बाहर रखा गया। यह पक्षपात छात्रों को अखर रहा है। उनका कहना है कि पढ़ाई और मेहनत में कोई कमी नहीं है तो फिर आर्थिक अधिकारों में यह अंतर क्यों रखा जा रहा है। इसी मांग को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर अड़े हुए हैं।
हॉस्टल की कमी और बाहर रहने की मजबूरी
कॉलेज की बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर भी काफी चिंताजनक है। छात्रों ने बताया कि कॉलेज हॉस्टल में कमरों की भारी किल्लत है। आलम यह है कि फर्स्ट ईयर की छात्राओं को एडमिशन के बाद शुरू के आठ महीनों तक बाहर किराए के कमरों में रहना पड़ता है। हॉस्टल में मेस की व्यवस्था न होने या कमियां होने की वजह से उन्हें होटल का खाना खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल आर्थिक रूप से बोझ डालती है बल्कि उनकी सुरक्षा और सेहत के लिहाज से भी ठीक नहीं है।
अपनी जेब से खरीदनी पड़ती है इलाज की सामग्री
डेंटल कॉलेज में संसाधनों का अभाव इस कदर है कि छात्रों को प्रैक्टिकल और इलाज के लिए जरूरी सामान भी खुद ही खरीदना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन उन्हें जरूरी उपकरण और डेंटल सामग्री उपलब्ध नहीं कराता। ऐसे में उन्हें मिलने वाले मामूली स्टाइपेंड का बड़ा हिस्सा इन सामानों की खरीदारी में ही खर्च हो जाता है। मरीजों के इलाज के लिए भी बुनियादी चीजों की कमी बनी रहती है जिससे उनकी शिक्षा और ट्रेनिंग पर बुरा असर पड़ रहा है।
प्रशासन का आश्वासन और छात्रों की चेतावनी
इस पूरे मामले पर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. विरेंद्र वाघेड़ का कहना है कि छात्रों की मांगों को लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही कोई रास्ता निकल आएगा। दूसरी तरफ हड़ताली छात्र अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अगले दो से तीन दिनों में मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो वे अपने आंदोलन को और ज्यादा उग्र करेंगे। फिलहाल कॉलेज में पढ़ाई और ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।



