
छत्तीसगढ़ के कद्दावर मंत्रियों और भाजपा विधायकों पर विवादित टिप्पणी करने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकांक्षा टोप्पो के पक्ष में अब आवाजें उठने लगी हैं। जहां एक तरफ भाजपा कार्यकर्ता उनके खिलाफ लामबंद हैं, वहीं बलरामपुर के रहने वाले अमानत खान खुलकर उनके समर्थन में आ गए हैं। अमानत ने आकांक्षा के हक में पूरे सरगुजा संभाग की पैदल पदयात्रा शुरू कर दी है। वे अपनी पीठ पर आकांक्षा टोप्पो का पोस्टर टांगकर गांव-गांव जा रहे हैं और लोगों को अपनी बात समझा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर ‘दोहरे मापदंड’ का लगाया आरोप
पदयात्रा पर निकले अमानत खान का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई में भेदभाव साफ नजर आता है। उन्होंने तर्क दिया कि सोशल मीडिया पर रोजाना सैकड़ों लोग अश्लीलता फैलाते हैं और गंदे वीडियो साझा करते हैं, लेकिन उन पर पुलिस कोई ठोस एक्शन नहीं लेती। अमानत के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति समाज या राजनीति की खामियों पर अपनी बात रखता है, तो उसे दबाने के लिए तुरंत एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। उन्होंने आकांक्षा के खिलाफ दर्ज मामले को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया है।
मंत्रियों पर टिप्पणी के बाद गरमाई है सियासत
गौरतलब है कि आकांक्षा टोप्पो ने पिछले दिनों महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, कृषि मंत्री रामविचार नेताम और विधायक रामकुमार टोप्पो को लेकर तीखे बयान दिए थे। इन बयानों में इस्तेमाल की गई भाषा को भाजपा ने ‘अभद्र’ करार दिया था। इसके बाद पूरे सरगुजा संभाग में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया था। अकेले बलरामपुर जिले के ही आठ अलग-अलग थानों में उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
सरगुजा संभाग में पैदल मार्च से मिल रहा समर्थन
अमानत खान की यह पदयात्रा सरगुजा संभाग के अलग-अलग हिस्सों से गुजर रही है। अमानत का संकल्प है कि वे पैदल चलकर इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगे। रास्ते में कई जगह ग्रामीण और युवा उनके साथ जुड़ रहे हैं। अमानत का मानना है कि केवल एक पक्ष की बात सुनकर किसी पर मुकदमा दर्ज करना न्यायसंगत नहीं है। इस मार्च के जरिए वे प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है, चाहे वह सत्ता के खिलाफ ही क्यों न हो।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजरें
आकांक्षा टोप्पो पर हुई एफआईआर के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ अमानत खान जैसे समर्थकों के सामने आने से मामला और भी पेचीदा हो गया है। फिलहाल इस विवाद ने सियासी मोड़ ले लिया है, जहां एक ओर सत्ताधारी दल इसे सम्मान की लड़ाई बता रहा है, तो दूसरी ओर समर्थक इसे ‘सच बोलने की सजा’ कह रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस इस मामले में क्या रुख अपनाती है और अमानत की यह पदयात्रा क्या रंग लाती है।



