
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने रायपुर में आयोजित 175वीं जनसुनवाई के दौरान कई गंभीर मामलों पर कड़ा फैसला सुनाया है। इस सुनवाई में ईएसआईसी अस्पताल की नर्सों के साथ हुए करीब 80 लाख रुपये के वेतन घोटाले और एमिटी यूनिवर्सिटी की छात्रा की आत्महत्या का मामला सबसे प्रमुख रहा। आयोग ने इन मामलों में कॉलेज प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर गहरा असंतोष जताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
नर्सों के वेतन पर डाका: बैंक और एजेंसी की मिलीभगत
ईएसआईसी अस्पताल की 13 नर्सों ने आयोग के सामने अपनी आपबीती सुनाई, जिसमें विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक एजेंसी की बड़ी धोखाधड़ी सामने आई है। नर्सों का आरोप है कि बैंक मैनेजर और एजेंसी की साठगांठ से उनके वेतन का आधा हिस्सा खाते में आते ही निकाल लिया जाता है। आयोग ने इसे सीधे तौर पर 70-80 लाख रुपये का वित्तीय घोटाला माना है और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में सभी आरोपियों को अनिवार्य रूप से पेश किया जाए।
एमिटी यूनिवर्सिटी सुसाइड केस: सुरक्षा में बड़ी चूक
छात्रा की आत्महत्या के मामले में आयोग ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। डॉ. किरणमयी नायक ने कॉलेज के अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे कि गर्ल्स हॉस्टल जैसे सुरक्षित स्थान पर बाहरी लड़का कैसे दाखिल हुआ। आयोग ने सीसीटीवी फुटेज की साइबर जांच न कराने पर भी संदेह जताया है और आशंका व्यक्त की है कि किसी खास व्यक्ति को बचाने के लिए तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।
भाई को हिदायत और अनुकंपा नियुक्ति विवाद
सुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला भी आया जहां एक भाई अपनी ही बहन को अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से वंचित करने के लिए परेशान कर रहा था। आयोग ने इस पारिवारिक विवाद में हस्तक्षेप करते हुए भाई को कड़ी चेतावनी दी कि वह अपनी बहन को किसी भी तरह से प्रताड़ित न करे। आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों का हनन करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
बच्चों की कस्टडी पर मानवीय फैसला
तलाकशुदा जोड़ों के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर होने वाले विवादों पर आयोग ने एक नई पहल की है। एक मामले में निर्देश दिया गया कि माता-पिता दोनों महीने में दो बार बच्चों से आयोग के दफ्तर में आकर मिल सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की अगले 6 महीनों तक कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े और उन्हें अपने दोनों अभिभावकों का स्नेह मिल सके।
दोषियों पर शिकंजा कसने की तैयारी
महिला आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि नर्सिंग घोटाले के आरोपी बैंक अधिकारियों और एजेंसी संचालकों को पुलिस की मदद से कटघरे में खड़ा किया जाएगा। वहीं एमिटी यूनिवर्सिटी को अपनी सुरक्षा खामियों और सीसीटीवी फुटेज पर विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट जमा करनी होगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।



