
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आयकर कानून 2025 के लिए नए ड्राफ्ट नियम तैयार कर लिए हैं। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे। सरकार का मुख्य मकसद वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता लाना और टैक्स चोरी पर लगाम लगाना है। नए प्रावधानों के आने के बाद अब महंगे शौक पालने और निवेश करने वालों के लिए अपने खर्चों का हिसाब देना जरूरी होगा। छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों के रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल बाजार पर इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।
महंगी प्रॉपर्टी और कारों पर रहेगी पैनी नजर
नए नियमों के अनुसार अब अगर आप 20 लाख रुपये से ज्यादा की जमीन या मकान खरीदते हैं तो पैन (PAN) कार्ड देना अनिवार्य होगा। इसी तरह 5 लाख रुपये से अधिक कीमत की कार या कोई भी वाहन खरीदने पर भी पैन कार्ड की जानकारी देना जरूरी कर दिया गया है। आयकर विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स की मदद से हर बड़े लेन-देन को ट्रैक करेगा। इसका मतलब है कि अब बड़ी खरीदारी करने वालों की जानकारी सीधे विभाग के पास पहुंच जाएगी।
होटल के बिल और नकद लेन-देन पर सख्ती
सरकार ने केवल प्रॉपर्टी तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है बल्कि आपकी जीवनशैली से जुड़े खर्चों पर भी शिकंजा कसा है। यदि आप किसी होटल में रुकते हैं और आपका बिल 1 लाख रुपये से ज्यादा आता है तो वहां भुगतान के समय पैन कार्ड दिखाना होगा। इसके साथ ही साल भर में 10 लाख रुपये से अधिक की नकद निकासी या जमा करने पर भी नियमों को कड़ा कर दिया गया है। नकद के जरिए होने वाले बड़े ट्रांजैक्शन अब विभाग की रडार पर रहेंगे।
एचआरए (HRA) के दायरे में आए नए शहर
टैक्स के कड़े नियमों के बीच नौकरीपेशा लोगों के लिए एक अच्छी खबर भी है। सरकार ने हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की छूट के लिए मेट्रो शहरों की सूची बढ़ा दी है। अब बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को भी मेट्रो शहरों की श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ से इन शहरों में जाकर नौकरी करने वाले प्रवासियों को टैक्स में ज्यादा छूट मिल सकेगी। इस फैसले से उन मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो महंगे किराए वाले शहरों में रह रहे हैं।
सुझावों के बाद जारी होगी अंतिम गाइडलाइंस
आयकर विभाग ने इन नए नियमों पर आम जनता और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। 22 फरवरी तक मिलने वाले फीडबैक की समीक्षा की जाएगी और इसके बाद मार्च 2026 में सरकार अंतिम गाइडलाइंस जारी कर देगी। अधिकारियों का मानना है कि इन बदलावों से टैक्स का आधार बढ़ेगा और जो लोग अपनी आय छिपाकर बड़ी संपत्ति खरीदते हैं उन्हें पकड़ना आसान होगा। यदि आप भी भविष्य में निवेश की योजना बना रहे हैं तो इन तारीखों और नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।
एआई (AI) से होगी टैक्स चोरी की पहचान
आयकर विभाग अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है ताकि टैक्स चोरी के पुराने तरीकों को बंद किया जा सके। नई व्यवस्था में हर वित्तीय लेन-देन का मिलान व्यक्ति की घोषित आय से किया जाएगा। अगर किसी व्यक्ति की आय कम है और उसके खर्चे या निवेश बहुत ज्यादा हैं तो सिस्टम अपने आप अलर्ट जारी कर देगा। सरकार चाहती है कि लोग ईमानदारी से टैक्स भरें और अपनी हर बड़ी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा विभाग को दें ताकि भविष्य में किसी भी तरह के कानूनी नोटिस से बचा जा सके।



