
Bijapur News: देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से पूरी तरह आजाद करने का लक्ष्य रखा गया है। इस समय सीमा के नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों की हताशा साफ नजर आ रही है। सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव से बैकफुट पर आए माओवादियों ने सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए स्टेट हाईवे 63 पर बड़ी साजिश रची थी। हालांकि, जवानों की मुस्तैदी ने इस खतरे को समय रहते भांप लिया और एक बड़े हादसे को टाल दिया।
आवापल्ली-मुरदण्डा मार्ग पर मिला मौत का जाल
12 फरवरी को बीजापुर के आवापल्ली इलाके में जिला पुलिस और सीआरपीएफ की 196वीं व 170वीं वाहिनी की संयुक्त टीम डिमाइनिंग (बम खोजने की ड्यूटी) पर निकली थी। मुरदण्डा कैंप से करीब 3 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क के किनारे जवानों को कुछ संदिग्ध निशान दिखाई दिए। सावधानी बरतते हुए जब बम निरोधक दस्ते (BDDS) ने जांच शुरू की, तो जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया एक शक्तिशाली आईईडी बरामद हुआ।
सड़क के 5 फीट नीचे प्लांट था 30 किलो विस्फोटक
नक्सलियों ने इस आईईडी को बेहद शातिर तरीके से प्लांट किया था। सड़क के किनारे फॉक्सहोल बनाकर करीब 5 फीट अंदर और सड़क की सतह से 2 फीट नीचे 30 किलो वजनी विस्फोटक दबाया गया था। जांच में पता चला कि इसमें स्विच सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था, जिसका उद्देश्य सुरक्षाबलों के बड़े वाहनों को उड़ाना था। विस्फोटक की गहराई ज्यादा होने के कारण उसे सुरक्षित बाहर निकालना संभव नहीं था, इसलिए मौके पर ही नियंत्रित धमाका कर उसे नष्ट किया गया।
गंगालूर में भी प्रेशर आईईडी किया गया डिफ्यूज
इसी दिन गंगालूर थाना क्षेत्र के डोडीतुमनार इलाके में भी सीआरपीएफ की 153वीं वाहिनी ने गश्त के दौरान सड़क पर बिछाया गया एक प्रेशर आईईडी बरामद किया। करीब 5 किलो वजनी इस बम को सुरक्षाबलों ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज कर दिया। नक्सलियों द्वारा मुख्य मार्गों और पगडंडियों पर इस तरह आईईडी बिछाने का मकसद जवानों की आवाजाही को रोकना और उनमें दहशत पैदा करना है।
कुख्यात कमांडर बसवराजू का स्मारक ध्वस्त
सुरक्षाबलों ने केवल विस्फोटक ही नहीं बरामद किए, बल्कि नक्सलियों के प्रतीकों पर भी कड़ा प्रहार किया। कुटरू क्षेत्र में कोबरा 210 वाहिनी ने इंद्रावती नदी के किनारे बने एक माओवादी स्मारक को ढहा दिया। यह स्मारक वर्ष 2025 में मारे गए कुख्यात माओवादी कमांडर सीसीएम बसवराजू की याद में अवैध रूप से बनाया गया था। इस कार्रवाई के जरिए सुरक्षाबलों ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्र में किसी भी गैरकानूनी निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माओवादी नेटवर्क पर मनोवैज्ञानिक प्रहार
गंगालूर के तोड़का-कोरचोली और पेद्दाकोरमा के जंगलों में भी सीआरपीएफ ने सर्चिंग के दौरान कई अन्य माओवादी स्मारकों को मलबे में तब्दील कर दिया। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्मारकों को तोड़ना नक्सलियों के मनोबल पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रहार है। इससे स्थानीय ग्रामीणों के बीच भी यह संदेश जाता है कि नक्सलियों का प्रभाव अब खत्म हो रहा है। इन कार्रवाइयों ने नक्सली नेटवर्क की जड़ों को हिलाकर रख दिया है।

इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और गश्त तेज
साजिशें नाकाम होने के बाद पूरे बीजापुर जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्टेट हाईवे 63 और अन्य आंतरिक मार्गों पर सर्चिंग ऑपरेशन बढ़ा दिया गया है। जवानों द्वारा आईईडी नष्ट करने के बाद सड़क पर बने बड़े गड्ढे को भरकर यातायात सुचारू कर दिया गया है। 31 मार्च की समय सीमा तक क्षेत्र में शांति बहाली के लिए सुरक्षाबल ‘एरिया डॉमिनेशन’ (इलाके पर नियंत्रण) की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं।



