
राजधानी रायपुर के तहसील कार्यालय में दस्तावेजों की नकल कॉपी मिलने में हो रही देरी ने हिंसक मोड़ ले लिया। हाईकोर्ट में अपील दायर करने के लिए जरूरी कागजात समय पर न मिलने से नाराज वकीलों ने दफ्तर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कल हुई इस घटना का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है। माहौल इतना बिगड़ गया कि कामकाज पूरी तरह ठप हो गया और दफ्तर के भीतर वकीलों और राजस्व कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
कर्मचारियों का आरोप: जातिगत टिप्पणी और गाली-गलौज की गई
तहसील कार्यालय के कर्मचारियों ने वकीलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मियों का कहना है कि वकीलों ने न केवल काम में बाधा डाली, बल्कि उनके साथ बदसलूकी भी की। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और एक कर्मचारी को उसकी जाति पूछकर डराने-धमकाने की कोशिश की। चर्चा यह भी है कि हंगामे के दौरान वकीलों ने राजस्व मंत्री तक का नाम घसीटते हुए गंभीर आरोप लगाए, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
वकीलों का पलटवार: बिना ‘खर्चे’ के नहीं मिलता कोई कागज
दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण कुमार त्रिपाठी ने भ्रष्टाचार का मोर्चा खोलते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कनिष्ठ (जूनियर) वकील जब आदेश की कॉपी लेने पहुंची, तो कर्मचारी ने साफ कह दिया कि बिना ‘सुविधा शुल्क’ के काम नहीं होगा। वकील का दावा है कि तहसील कार्यालय दलाली का केंद्र बन चुका है और आम आदमी को ऑनलाइन-ऑफलाइन की पेचीदगियों में फंसाकर वसूली की जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि वे गलत तरीके से पैसे देकर काम कराने के सख्त खिलाफ हैं।
तहसीलदार की कुर्सी पर ‘बाहरी’ व्यक्ति का कब्जा?
विवाद के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। अधिवक्ताओं का आरोप है कि जिस समय वे तहसीलदार ख्याति नेताम की कोर्ट पहुंचे, वहां वे मौजूद नहीं थीं। उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति की नेम प्लेट लगी थी और कोई बाहरी व्यक्ति वहां बैठा था। वकीलों ने सवाल उठाया है कि सरकारी दफ्तरों में जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी में निजी लोग कैसे काम संभाल रहे हैं। इसी अव्यवस्था को लेकर वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने दफ्तर में ही नारेबाजी शुरू कर दी।
एसडीएम ने दिए जांच के आदेश, प्रशासन सख्त
पूरे विवाद के तूल पकड़ने के बाद एसडीएम नंद कुमार चौबे ने मामले में दखल दिया है। उन्होंने कहा कि वकीलों को अगर किसी कर्मचारी या व्यवस्था से शिकायत थी, तो उन्हें सीधे उच्च अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए था। दफ्तर में हंगामा करना और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करना स्वीकार्य नहीं है। एसडीएम ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की बात कही है और आश्वासन दिया है कि दोषी पाए जाने वालों पर उचित कार्यवाही की जाएगी।



