
छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों द्वारा अवैध रूप से मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए जेल प्रशासन ने कमर कस ली है। प्रदेश की सभी जेलों में लगे वर्षों पुराने 2G जैमर को अब आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। जेल मुख्यालय के अधिकारी दिल्ली की तिहाड़ और पुणे की यरवदा जेल में इस्तेमाल होने वाली तकनीक का अध्ययन कर रहे हैं। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य जेल की चारदीवारी के भीतर से संचालित होने वाले नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई सेंध न लगा सके।
स्मार्टफोन्स के आगे पस्त हो गई थी पुरानी मशीनें
जेलों में मौजूदा जैमर साल 2005-2006 के दौरान लगाए गए थे। उस समय तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी और साधारण फोन का चलन था। आज के दौर में 4G और 5G स्मार्टफोन आने के बाद ये पुराने जैमर बेअसर साबित हो रहे हैं। कई बार जेल के भीतर से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए विभाग अब मोबाइल कंपनियों के विशेषज्ञों की मदद लेकर इन जैमर्स को 5G तकनीक के अनुकूल बनाने जा रहा है।
नई तकनीक से केवल जेल परिसर में ही ब्लॉक होगा सिग्नल
अक्सर जेलों में जैमर लगने से एक बड़ी समस्या यह आती थी कि आसपास रहने वाले लोगों का मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो जाता था। रायपुर जेल के मामले में तो अंबेडकर अस्पताल और जेल मुख्यालय तक फ्रीक्वेंसी गायब हो जाती थी। इस समस्या को सुलझाने के लिए अब ‘कॉल ब्लॉकिंग’ (टीसीबीपीएस) तकनीक पर विचार किया जा रहा है। यह नई प्रणाली इतनी सटीक होगी कि इसका असर सिर्फ जेल की बाउंड्री के भीतर ही रहेगा और पड़ोस की बस्तियों में रहने वाले लोगों के मोबाइल सिग्नल पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एक्सपर्ट्स की मदद से फ्रिक्वेंसी रोकने का मास्टर प्लान
पुराने जैमर्स को अपडेट करने के लिए तकनीकी जानकारों की एक टीम काम कर रही है। जेल विभाग का मानना है कि केवल जैमर की संख्या बढ़ाना समाधान नहीं है, बल्कि फ्रीक्वेंसी को पूरी तरह ब्लॉक करना जरूरी है। नए जैमर न केवल वॉयस कॉल को रोकेंगे, बल्कि इंटरनेट डेटा और मैसेजिंग सेवाओं को भी काम नहीं करने देंगे। इससे जेल के भीतर छिपे मोबाइल फोन महज एक प्लास्टिक के डिब्बे बनकर रह जाएंगे।
डीजी जेल ने दी तकनीकी कवायद की जानकारी
जेल महानिदेशक (डीजी जेल) हिमांशु गुप्ता ने बताया कि जेलों में मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह से बंद करने के लिए विभागीय स्तर पर मंथन चल रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक के मामले में हम पीछे नहीं रहना चाहते, इसलिए आधुनिक जैमर्स के संबंध में सारी तकनीकी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से यह अपग्रेडेशन बहुत जरूरी है क्योंकि अपराधी जेल से बाहर अपने साथियों के संपर्क में रहने के लिए नए-नए तरीके इजाद करते रहते हैं।
कैदियों के सोशल मीडिया प्रेम पर लगेगी लगाम
बीते कुछ समय में जेलों के अंदर से कैदियों के रील बनाने या फेसबुक लाइव करने जैसे मामले सामने आए हैं, जिससे प्रशासन की काफी किरकिरी हुई थी। नए जैमर्स लगने के बाद इन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। जेल के सुरक्षाकर्मी भी इस तकनीक के आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि तलाशी अभियान के अलावा तकनीकी तौर पर भी कैदियों की हरकतों पर नजर रखी जा सके।



