
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में करीब 6 एकड़ जमीन पर लहलहा रही अफीम की खेती ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस मामले पर पहली बार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट लफ्जों में कहा है कि उनकी सरकार अपराध और नशे के कारोबार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच के तार जहां तक जुड़ेंगे, वहां तक पुलिस की कार्रवाई पहुंचेगी। राजधानी रायपुर से महज कुछ ही दूरी पर चल रहे इस काले कारोबार ने पुलिस प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
5 एकड़ से ज्यादा में अफीम की खेती: 8 करोड़ के पौधे बरामद
दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में पुलिस की छापेमारी के दौरान जो मंजर दिखा, उसने सबके होश उड़ा दिए। करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल के विशाल रकबे में अफीम की फसल उगाई जा रही थी। पुलिस ने मौके से लगभग 14 लाख 30 हजार अफीम के पौधे जब्त किए हैं। बाजार में इन पौधों की अनुमानित कीमत करीब 7.88 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह प्रदेश के इतिहास में अफीम की खेती पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जांच में पता चला है कि इस पूरे सिंडिकेट को बहुत ही शातिर तरीके से चलाया जा रहा था।
भाजपा नेता समेत चार गिरफ्तार: बाउंसरों के साये में हो रही थी खेती
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को सलाखों के पीछे भेजा है। इसमें मुख्य आरोपी भाजपा का पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष विनायक ताम्रकार (58) है। उसके साथ ही विकास विश्नोई, मनीष ठाकुर और अचला राम जाट को भी गिरफ्तार किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फार्महाउस की सुरक्षा के लिए बकायदा बाउंसर तैनात किए गए थे और काम करने के लिए खास तौर पर राजस्थान से मजदूर बुलाए गए थे। बाहरी लोगों को अंदर आने की इजाजत नहीं थी, जिससे किसी को शक न हो।
कांग्रेस का तीखा हमला: गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
अफीम की खेती में भाजपा नेता का नाम सामने आते ही कांग्रेस ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण के बिना इतनी बड़ी मात्रा में नशा उगाना मुमकिन नहीं है। कांग्रेस ने गृहमंत्री विजय शर्मा को इस नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से बर्खास्त करने की मांग की है। विधानसभा सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर विपक्ष के तेवर काफी कड़े नजर आए।
सदन में गूंजा अफीम कांड: नेता प्रतिपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
विधानसभा के बजट सत्र में शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर से मात्र 50 किलोमीटर की दूरी पर अफीम की खेती होना बेहद चिंताजनक है। महंत ने आरोप लगाया कि पूरे छत्तीसगढ़ को नशे के दलदल में धकेलने की यह एक बड़ी साजिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर खुफिया तंत्र को इतने महीनों तक इस खेती की भनक क्यों नहीं लगी? विपक्ष ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग दोहराई है।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने उठाए सवाल: ‘एफआईआर में खेल की कोशिश’
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए कहा कि एफआईआर में मुख्य आरोपी का नाम पीछे रखा गया है, जो मामले को कमजोर करने या लीपापोती करने की कोशिश जैसा दिखता है। बघेल ने कहा कि होली के त्योहार से ठीक पहले इस तरह की अवैध खेती का खुलासा होना यह बताता है कि प्रदेश में अब नशे का व्यापार ही नहीं, बल्कि उत्पादन भी शुरू हो चुका है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।
मुख्यमंत्री का आश्वासन: निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई का वादा
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जनता को आश्वस्त किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में पुलिस नहीं आएगी। सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी को नशे से दूषित करने वालों के लिए जेल ही सही जगह है। फिलहाल पुलिस की टीमें राजस्थान और अन्य राज्यों के कनेक्शन खंगाल रही हैं ताकि इस रैकेट की पूरी जड़ तक पहुँचा जा सके।
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