धान में रेत मिलाकर गबन की साजिश: धान खरीदी केंद्र प्रभारी बर्खास्त, जांच में खुली हेराफेरी की पोल

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में धान खरीदी के दौरान भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। व्यक्तिगत फायदे के लिए किसानों के पसीने की कमाई में रेत और कंकड़ मिलाने वाले सरकारी कर्मचारी पर जिला प्रशासन ने सख्त गाज गिराई है। धान की बोरियों का वजन बढ़ाने के लिए उनमें रेत मिलाकर हेराफेरी करने के आरोपी खरीदी केंद्र प्रभारी को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया गया है। प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई से जिले के अन्य उपार्जन केंद्रों में हड़कंप मच गया है।

5 हजार से ज्यादा बोरियों में मिलाई रेत: वीडियो वायरल होने पर खुली पोल

यह पूरा मामला निपनिया स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति का है। यहां धान खरीदी प्रभारी लीलाराम सेन पर आरोप है कि उन्होंने हमालों के जरिए धान की बोरियों में मिलावट कराई। मिली जानकारी के अनुसार, करीब 5300 बोरियों में प्रति बोरी 2 से 3 किलोग्राम रेत, कंकड़ और धूल-मिट्टी मिलाई गई थी। इस धांधली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर 8 मार्च को संयुक्त टीम ने केंद्र का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान मौके पर भारी अनियमितताएं पाई गईं।

137 क्विंटल धान का अंतर: व्यक्तिगत लाभ के लिए रचा गया खेल

प्रशासनिक टीम ने जब निपनिया केंद्र के स्टॉक का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो वहां आधिकारिक आंकड़ों से 137.20 क्विंटल धान ज्यादा मिला। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि यह अतिरिक्त मात्रा बोरियों में मिलाई गई रेत और मिट्टी के कारण थी। आरोपी प्रभारी की योजना थी कि मिलाए गए रेत के वजन के बराबर करीब 132 क्विंटल असली धान को निकालकर उसे बाहर बेच दिया जाए। इस तरह सरकारी रिकॉर्ड में वजन पूरा दिखाकर निजी तौर पर लाखों रुपये का गबन करने की तैयारी थी।

नियम 16 के तहत कड़ी कार्रवाई: सेवा से हमेशा के लिए छुट्टी

जांच दल के प्रतिवेदन के आधार पर सहकारिता उपायुक्त ने आरोपी लीलाराम सेन को पद के दुरुपयोग और घोर लापरवाही का दोषी माना। छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 55 (1) के तहत जारी सेवा नियमों का हवाला देते हुए आरोपी को बर्खास्त करने की सिफारिश की गई। प्राधिकृत अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खरीदी प्रभारी को तत्काल सेवा से पृथक (Dismiss) कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रशासन की चेतावनी: रडार पर अन्य खरीदी केंद्र

निपनिया केंद्र पर हुई इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन अब अन्य केंद्रों पर भी पैनी नजर रख रहा है। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धान की गुणवत्ता और वजन से समझौता करने वालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। स्थानीय किसानों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि मिलावटी धान के कारण न केवल सरकार को चूना लग रहा था, बल्कि इससे मिलिंग की प्रक्रिया में भी बाधा आती है। आने वाले दिनों में धान उठाव की प्रक्रिया के दौरान और भी केंद्रों की सघन जांच की जा सकती है।

Also Read: सरकारी राशन दुकान में 2.62 करोड़ का घोटाला!, 20 विक्रेताओं पर गिरी गाज, 6 दुकानदारों का लाइसेंस निलंबित

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button