CG Legislative Assembly: विधानसभा में हंगामा: भाजपा विधायक को मिली जान से मारने की धमकी पर विपक्ष का वॉकआउट, सरकार के जवाब न देने पर कांग्रेस ने किया बहिष्कार

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन भारी शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। शून्यकाल के दौरान सदन में उस वक्त तनाव बढ़ गया जब विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्ता पक्ष के विधायक रिकेश सेन को मिली जान से मारने की धमकी का मामला पुरजोर तरीके से उठाया। विपक्ष इस बात पर अड़ा था कि सदन के एक सदस्य की सुरक्षा का मामला बेहद गंभीर है और इस पर सरकार को आधिकारिक बयान देना चाहिए। जब विधानसभा अध्यक्ष (आसंदी) ने इस मामले में कोई विशेष व्यवस्था देने से इनकार कर दिया, तो नाराज कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया और बाहर चले गए।

भूपेश बघेल ने उठाया सुरक्षा का सवाल: “कल ही गृहमंत्री को चेताया था”

पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सदन में कहा कि उन्होंने पिछले दिन ही गृहमंत्री का ध्यान इस धमकी की ओर दिलाया था, लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बघेल का कहना था कि जब सत्ता पक्ष का ही एक विधायक सुरक्षित नहीं है और उसे सरेआम धमकियां मिल रही हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा। उन्होंने मांग की कि गृहमंत्री खुद सदन में आकर बताएं कि इस मामले में अब तक क्या जांच हुई है और विधायक की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

आसंदी की व्यवस्था से असंतुष्ट विपक्ष: “बिना जवाब के नहीं चलेगी कार्यवाही”

कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आसंदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सरकार को वक्तव्य देने के लिए निर्देशित करने की मांग की। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए व्यवस्था देने से मना कर दिया कि मामला सरकार के संज्ञान में आ चुका है और इसके लिए अलग से किसी बयान की जरूरत नहीं है। अध्यक्ष के इस रुख से विपक्षी सदस्य भड़क गए। भूपेश बघेल ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब तक सरकार इस गंभीर विषय पर अपना पक्ष नहीं रखती, तब तक विपक्ष सदन की किसी भी चर्चा में हिस्सा नहीं लेगा। इसके तुरंत बाद पूरी कांग्रेस टोली सदन से बाहर निकल गई।

रिकेश सेन की सफाई: “मेरी सुरक्षा की चिंता सरकार को है, राजनीति न करें”

विपक्ष के वॉकआउट के बाद भाजपा विधायक रिकेश सेन ने सदन में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कांग्रेस के इस कदम को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया। सेन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा और मिली धमकी के संबंध में सरकार और संसदीय कार्यमंत्री को पूरी जानकारी दे दी है। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विधायक ने यह भी कहा कि विपक्ष को इस मामले की पूरी सच्चाई जाने बिना राजनीति नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह एक संवेदनशील व्यक्तिगत सुरक्षा का विषय है।

कानून व्यवस्था पर घिरी सरकार: विपक्ष के तीखे तेवर

कांग्रेस का तर्क है कि सदन के भीतर विधायक को मिली धमकी का मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था का प्रतीक है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपराधियों पर लगाम कसने में नाकाम साबित हो रही है। सदन से बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए कांग्रेस विधायकों ने कहा कि जब निर्वाचित प्रतिनिधियों को डराया जा रहा है, तो राज्य में भय का माहौल पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने सरकार पर मामले को दबाने और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप भी लगाया।

सत्ता पक्ष का पलटवार: “भ्रम फैलाकर सदन को गुमराह कर रही कांग्रेस”

दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के मंत्रियों और विधायकों ने कांग्रेस के बहिष्कार को ‘अनावश्यक ड्रामा’ करार दिया। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों पर हमेशा सार्वजनिक चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास सदन में चर्चा के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे ऐसे विषयों को तूल देकर कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि पुलिस अपनी जांच कर रही है और विधायक रिकेश सेन को पर्याप्त सुरक्षा घेरा प्रदान किया गया है, इसलिए सदन का बहिष्कार करने का कोई तार्किक आधार नहीं था।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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