
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के शुक्रवार की शुरुआत भावुक क्षणों के साथ हुई। सदन ने अविभाजित मध्य प्रदेश की पूर्व विधायक मंगलीबाई रावटे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत सहित सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सम्मान स्वरूप सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई, जिसके बाद प्रश्नकाल की शुरुआत हुई।
सफेद क्रांति पर सवाल: छत्तीसगढ़ में दूध की भारी कमी, राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की ‘दयनीय’ स्थिति पर सरकार को घेरा। मंत्री रामविचार नेताम ने स्वीकार किया कि छत्तीसगढ़ वर्तमान में दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता मात्र 194 ग्राम है, जबकि भारतीय मानक 300 ग्राम प्रतिदिन का है। चंद्राकर ने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर कब तक प्रदेश दूध के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहेगा?
कृत्रिम गर्भाधान पर बहस: लाखों खर्च, फिर भी लक्ष्य से दूर विभाग
सदन में गौवंशीय पशुओं के प्रजनन और कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी तीखी बहस हुई। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 99.84 लाख गौवंशीय पशु हैं और 1585 केंद्रों के जरिए कृत्रिम गर्भाधान का कार्य किया जा रहा है। विधायक अजय चंद्राकर ने पिछले तीन वर्षों में हुए 16.93 लाख गर्भाधानों और उन पर खर्च हुए 10.71 करोड़ रुपयों की सार्थकता पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इतने निवेश के बाद भी पशुओं की नस्ल और दूध उत्पादन में सुधार क्यों नहीं दिख रहा है?
चिराग परियोजना का बुझा ‘दीया’: 183 करोड़ का प्रोजेक्ट समय से पहले बंद
विधानसभा में सबसे ज्यादा गर्मी ‘चिराग परियोजना’ (CHIRAAG) को लेकर देखने को मिली। आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए शुरू की गई इस 183 करोड़ रुपये की योजना को समय से पहले 26 मार्च 2025 को बंद कर दिया गया। मंत्री रामविचार नेताम ने खुलासा किया कि विश्व बैंक से मिले ऋण का केवल एक प्रतिशत ही उपयोग हो पाया। अपेक्षित प्रगति न होने के कारण भारत सरकार ने समीक्षा के बाद इस प्रोजेक्ट को बंद करने का नोटिस जारी किया था।
भूपेश बघेल का पलटवार: फंड वापसी की तारीख पर फंसा पेंच
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चिराग परियोजना के समर्पण की तारीखों और प्रक्रिया पर सवाल दागते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने पूछा कि आखिर 2024-25 में इस पर क्या काम हुआ और फंड कब वापस किया गया? मंत्री नेताम ने स्पष्ट किया कि 18 मार्च 2025 को राज्य सरकार को इसकी सूचना दी गई थी। इस पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की ढिलाई की वजह से आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए आई राशि वापस लौट गई।
दोषियों पर गिरेगी गाज: मंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश
परियोजना की विफलता और अधिकारियों की लापरवाही पर अजय चंद्राकर के कड़े रुख के बाद मंत्री रामविचार नेताम ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि चिराग परियोजना के फेल होने के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। मंत्री ने कहा, “योजना में कई स्तरों पर कमियां और भर्तियों में गड़बड़ी देखी गई है। जो भी अधिकारी इस विफलता के लिए जिम्मेदार होंगे, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।”

कानून-व्यवस्था पर चिंता: चाकूबाजी और नशे के खिलाफ ध्यानाकर्षण
प्रश्नकाल के बाद सदन में कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी छाया रहा। अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और धरमलाल कौशिक जैसे वरिष्ठ विधायकों ने रायपुर सहित प्रदेश के शहरी इलाकों में बढ़ रही चाकूबाजी की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। सदन में कुल 77 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाए गए, जिनमें किसानों की समस्याएं, पशु तस्करी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। सरकार ने इन सभी मुद्दों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
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