खाकी का खौफ खत्म: रायपुर में टीआई का हाथ मरोड़ा, बिलासपुर में डीजी के बेटे को जड़ा तमाचा

छत्तीसगढ़ में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे पुलिस वालों पर भी हमला करने से नहीं हिचक रहे हैं। न्यायधानी बिलासपुर में डीजी के बेटे के साथ हुई मारपीट की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि राजधानी रायपुर से एक और सनसनीखेज मामला सामने आ गया। यहां एक रसूखदार युवक ने बीच सड़क पर न केवल हंगामा किया, बल्कि ड्यूटी पर तैनात थाना प्रभारी (TI) का हाथ मरोड़कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस के इकबाल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

गश्त के दौरान टीआई पर हमला

मामला रायपुर के गंज थाना क्षेत्र का है। 14 मार्च की रात करीब साढ़े 12 बजे गंज थाना प्रभारी सुनील दास अपनी टीम के साथ गश्त पर निकले थे। नमस्ते चौक के पास भारी ट्रैफिक जाम देखकर जब टीआई अपनी गाड़ी से नीचे उतरे, तो उन्होंने देखा कि एक युवक ने अपनी कार बीच सड़क पर गलत तरीके से पार्क कर रखी थी। जब टीआई ने उसे गाड़ी हटाने को कहा, तो युवक ने सहयोग करने के बजाय वर्दी का रौब झाड़ने की कोशिश शुरू कर दी।

‘तुम मुझे जानते नहीं हो…’ और मरोड़ दिया हाथ

आरोपी युवक, जिसकी पहचान हंसु कुमार चंद्रवंशी के रूप में हुई है, पुलिस को देखते ही भड़क गया। उसने चिल्लाते हुए कहा, “तुम मुझे जानते नहीं हो, मैं कौन हूं।” टीआई सुनील दास और उनके साथ मौजूद आरक्षकों ने उसे बार-बार समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी धक्का-मुक्की पर उतारू हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि युवक ने थाना प्रभारी का हाथ पकड़कर इतनी जोर से मरोड़ा कि उनके कंधे की हड्डी खिसक गई (डिस्लोकेट हो गई)।

आरोपी नशे में धुत, टीआई एम्स में भर्ती

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने आरोपी को काबू में किया और उसे थाने लेकर आए। मेडिकल जांच में पुष्टि हुई कि आरोपी शराब के नशे में धुत था। इधर, गंभीर रूप से घायल थाना प्रभारी सुनील दास को तत्काल एम्स (AIIMS) अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके कंधे में आई गंभीर चोट का इलाज शुरू किया। पुलिस ने कबीरधाम निवासी आरोपी हंसु चंद्रवंशी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।

बिलासपुर में डीजी के बेटे से बदसलूकी

रायपुर की घटना से ठीक पहले बिलासपुर में भी ऐसी ही एक वारदात हुई थी। यहां छत्तीसगढ़ के डीजी पवन देव के बेटे तेजस्व देव, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, के साथ पार्किंग को लेकर मारपीट की गई। तेजस्व बिलासपुर के अशोक नगर स्थित इंडियन कॉफी हाउस के पास अपने क्लाइंट से मिलने पहुंचे थे। अपनी कार पार्क करते समय स्कॉर्पियो सवार एक युवक ने उनसे बहस शुरू कर दी और देखते ही देखते उन्हें जोरदार थप्पड़ जड़ दिया।

थाने तक किया पीड़ित का पीछा

पीड़ित तेजस्व देव ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने न केवल उनके साथ हाथापाई की, बल्कि शिकायत करने जाते समय थाने तक उनका पीछा भी किया। जब पुलिस सक्रिय हुई, तब आरोपी अपनी स्कॉर्पियो लेकर फरार हो गया। हालांकि, मामला डीजी के बेटे से जुड़ा होने के कारण बिलासपुर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और घेराबंदी कर आरोपी सागर जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया।

अपराधियों में खत्म होता पुलिस का डर

इन दोनों बैक-टू-बैक घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि बदमाशों के मन से पुलिस का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। जब डीजी के बेटे और शहर के टीआई ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। रसूख और नशे के मेल ने अपराधियों को इतना बेखौफ बना दिया है कि वे वर्दी पर हाथ उठाने को अपनी शान समझने लगे हैं।

वीआईपी जिलों में सुरक्षा पर सवाल

रायपुर और बिलासपुर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिले माने जाते हैं। राजधानी में टीआई का कंधा डिस्लोकेट कर देना यह बताता है कि रात के समय गश्त के दौरान पुलिस को भी अब बैकअप और अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत महसूस होने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त उदाहरण पेश नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थितियां और भी बिगड़ सकती हैं।

जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी

फिलहाल, दोनों ही मामलों में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। रायपुर के आरोपी हंसु चंद्रवंशी और बिलासपुर के सागर जायसवाल पर विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि वर्दी पर हाथ उठाने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी और किसी भी तरह के राजनीतिक या सामाजिक दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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