
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पतालों पर प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसा है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर नर्सिंग होम एक्ट के नियमों का उल्लंघन करने वाले 5 निजी अस्पतालों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। ये सभी अस्पताल आयुष्मान योजना के पैनल में भी शामिल थे। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से जिले के चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान इन अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और मानकों की भारी कमी पाई गई थी।
124 अस्पतालों की हुई थी जांच, 48 को मिला था नोटिस
जिला प्रशासन ने आयुष्मान योजना से जुड़े सभी निजी अस्पतालों की हकीकत जानने के लिए चार विशेष निरीक्षण टीमों का गठन किया था। इन टीमों में स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और आयुष विभाग के विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। जिले के कुल 124 निजी अस्पतालों की सघन जांच की गई, जिसमें से 48 अस्पतालों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मिली। इन 48 अस्पतालों को छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह अधिनियम के तहत नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था।
दोबारा निरीक्षण में खुली पोल, सुधारने की जगह बरती लापरवाही
नोटिस मिलने के बाद जब इन अस्पतालों ने अपना जवाब पेश किया, तो प्रशासन ने दावों की सच्चाई परखने के लिए दोबारा औचक निरीक्षण कराया। सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि दोबारा हुई जांच में 43 अस्पतालों ने तो अपनी कमियां सुधार ली थीं, लेकिन 5 अस्पताल ऐसे निकले जिन्होंने नियमों को ताक पर रखना जारी रखा। इन अस्पतालों में न तो पर्याप्त स्टाफ था और न ही इलाज के लिए जरूरी मानक उपकरण मौजूद थे। इसे गंभीर चूक मानते हुए प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया।
इन 5 अस्पतालों पर गिरी गाज, अब नहीं होगा इलाज
प्रशासन ने जिन अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए हैं, उनमें पाटन का दाउजी मेमोरियल हॉस्पिटल, पुलगांव का प्राची हॉस्पिटल और जामुल भिलाई का जीवन ज्योति हॉस्पिटल शामिल है। इसके अलावा खुर्सीपार स्थित आई.एम.आई. हॉस्पिटल और भिलाई जीई रोड के आशीर्वाद नर्सिंग होम पर भी ताला लग गया है। नर्सिंग होम एक्ट की अनुसूची के तहत तय मानकों का उल्लंघन करने के कारण इन सभी संस्थानों को अब मरीज भर्ती करने या इलाज करने की अनुमति नहीं होगी।
मरीजों की सुरक्षा के लिए जारी रहेगा अभियान
कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि आयुष्मान योजना के नाम पर मरीजों से वसूली या घटिया इलाज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से निजी क्लीनिकों और अस्पतालों की मॉनिटरिंग करें। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत है और जो भी अस्पताल तय मापदंडों को पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता से भी अपील की गई है कि वे केवल पंजीकृत और मानकों को पूरा करने वाले अस्पतालों में ही उपचार कराएं।
अस्पताल संचालकों को सख्त हिदायत
सीएमएचओ ने जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों को हिदायत दी है कि वे अपने संस्थानों में फायर सेफ्टी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और इमरजेंसी सेवाओं को दुरुस्त रखें। छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह अधिनियम 2010 और नियम 2013 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। प्रशासन का कहना है कि अस्पतालों का उद्देश्य लाभ कमाना तो हो सकता है, लेकिन यह मरीजों की जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए। जिन अस्पतालों के लाइसेंस रद्द हुए हैं, वे अब कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही दोबारा आवेदन कर सकेंगे।



