
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं। युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। रविवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में एक उच्चस्तरीय आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य युद्ध की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना था। पीएम मोदी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वैश्विक संकट का असर देश के आम उपभोक्ता और खेती-किसानी पर नहीं पड़ना चाहिए।
तेल और खाद की सप्लाई पर संकट: सरकार ने कसी कमर
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज की बारीकी से समीक्षा की। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और खाद बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल खाड़ी देशों से आयात करता है। युद्ध की वजह से यदि सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो देश में पेट्रोल-डीजल और खाद की कीमतों में उछाल आ सकता है। सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि किसी भी सूरत में जरूरी चीजों की किल्लत न होने पाए और वैकल्पिक रास्तों को तैयार रखा जाए।
होर्मुज स्ट्रेट का खतरा: जहाँ से गुजरता है दुनिया का 20% तेल
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव का सबसे बड़ा केंद्र ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) है। यह वह समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है और जहाजों की आवाजाही पर पाबंदियां लग रही हैं। अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत के लिए इस मार्ग को सुरक्षित रखना और अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है।
10 से ज्यादा देशों के संपर्क में पीएम: कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज
जंग के बादल मंडराते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर कमान संभाल ली है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान समेत 10 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर सीधी बात की है। पीएम का संदेश साफ है कि विवादों का हल बातचीत से निकलना चाहिए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को नुकसान न पहुंचे। भारत इस समय एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका में है, जो शांति बहाली के साथ-साथ अपने व्यापारिक हितों की रक्षा कर रहा है।
किसानों की चिंता: रबी और खरीफ की फसलों के लिए खाद का इंतजाम
युद्ध का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारत की रसोई और खेतों से जुड़ा है। उर्वरक (खाद) उत्पादन के लिए आवश्यक कई रसायन खाड़ी देशों से आते हैं। पीएम मोदी ने कृषि मंत्रालय और उर्वरक विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे खाद का पर्याप्त स्टॉक जमा रखें। सरकार नहीं चाहती कि ऐन फसलों की बुवाई के समय किसानों को यूरिया या डीएपी के लिए परेशान होना पड़े। इसके लिए अन्य देशों से खाद आयात करने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
भविष्य की तैयारी: क्या है सरकार का ‘प्लान-B’?
बैठक में ‘प्लान-B’ पर विस्तार से चर्चा हुई। इसका मतलब है कि अगर खाड़ी देशों से तेल या गैस की सप्लाई रुकती है, तो भारत रूस या लैटिन अमेरिकी देशों से आयात बढ़ा सकता है। साथ ही, घरेलू स्तर पर तेल के रणनीतिक भंडारों (Strategic Reserves) का उपयोग करने की योजना भी तैयार है। सरकार इंटरनेशनल ट्रेड रूट में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए दूसरे सुरक्षित रास्तों की तलाश कर रही है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को युद्ध के झटकों से बचाया जा सके।
आम जनता को राहत: कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश
प्रधानमंत्री मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार की हर हलचल पर 24 घंटे नजर रखें। सरकार का प्रयास है कि तेल कंपनियों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जाए ताकि आम जनता को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके। इसके साथ ही बिजली उत्पादन के लिए जरूरी कोयले और गैस की आपूर्ति को भी प्राथमिकता पर रखा गया है ताकि गर्मियों के मौसम में बिजली संकट पैदा न हो।
Also Read: VIDEO: देश का पहला जाति मुक्त गांव, सामाजिक बदलाव की दिशा में ऐतिहासिक कदम, जानिए किस शहर में है?



