
दुर्ग जिले के ग्राम करसा में मंगलवार को रसोई गैस की सप्लाई न होने से नाराज लोगों का सब्र जवाब दे गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने एचपी गैस के सिलेंडर करीब 20 दिन पहले बुक कराए थे, लेकिन अब तक घर पर डिलीवरी नहीं पहुंची है। बार-बार एजेंसी के चक्कर काटने और शिकायत करने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीणों ने विरोध का रास्ता अपनाया। लोगों का कहना है कि सिलेंडर न मिलने से उनके घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और रोजमर्रा के खान-पान में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन से थमी रफ्तार
गुस्साए ग्रामीणों ने गांव के पास से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क के बीचों-बीच प्रदर्शन होने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और कुछ ही देर में सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों ने गैस एजेंसी के प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चक्काजाम की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण तुरंत सिलेंडर बांटने की मांग पर अड़े रहे।
महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें, चूल्हा फूंकने को मजबूर
गैस की किल्लत का सबसे ज्यादा असर घर की महिलाओं पर पड़ रहा है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बताया कि सिलेंडर खत्म होने के बाद अब उन्हें फिर से पुराने ढर्रे पर लौटकर लकड़ी और चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। गैस न होने से सुबह बच्चों को स्कूल भेजने और समय पर खाना बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि एजेंसी की मनमानी पर लगाम कसी जाए और वितरण व्यवस्था को नियमित किया जाए ताकि लोगों को मानसिक और शारीरिक परेशानी न झेलनी पड़े।
उग्र आंदोलन की चेतावनी और जल्द समाधान की मांग
प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि यह चक्काजाम केवल एक चेतावनी है। यदि अगले कुछ दिनों के भीतर गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और लंबित सिलेंडरों का वितरण शुरू नहीं किया गया, तो वे इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन करेंगे। फिलहाल अधिकारियों के आश्वासन के बाद रास्ता खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इलाके में तनाव और नाराजगी अभी भी बनी हुई है। ग्रामीण अब इस मामले में जिला प्रशासन के हस्तक्षेप का इंतजार कर रहे हैं ताकि गैस की कालाबाजारी या सप्लाई में हो रही देरी को रोका जा सके।
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