
Dhamtari News: धमतरी जिले के ग्राम अछोटा से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक पंच को अपने पद का दुरुपयोग करना इतना भारी पड़ा कि उन्हें न सिर्फ पद से हाथ धोना पड़ा, बल्कि भविष्य की राजनीति के दरवाजे भी बंद हो गए। अवैध तरीके से सरकारी पट्टे बांटने और ग्रामीणों से पैसे वसूलने के आरोप में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) की इस कार्रवाई से जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों में भी हड़कंप मच गया है।
अवैध पट्टे और वसूली का लगा गंभीर आरोप
पूरा मामला ग्राम अछोटा के पंच अनीश देवांगन से जुड़ा है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रशासन को शिकायत दी थी कि अनीश देवांगन नियम-कायदों को ताक पर रखकर लोगों को पट्टे बांट रहे हैं। आरोप था कि इन पट्टों के बदले उन्होंने ग्रामीणों से मोटी रकम भी वसूली। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और गोपनीय तरीके से मामले की तहकीकात शुरू करवाई। ग्रामीणों का कहना है कि पद की गरिमा भूलकर पंच ने निजी लाभ के लिए सरकारी जमीनों का सौदा करना शुरू कर दिया था।
नायब तहसीलदार की जांच में हुई पुष्टि
एसडीएम पीयूष तिवारी के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज और गवाह सामने आए जिनसे यह साबित हो गया कि पट्टा वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह गैरकानूनी थी। तहसीलदार की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि अनीश देवांगन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद एसडीएम न्यायालय ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना और अंततः आरोपों को सही पाया।
धारा 40 के तहत पद से किए गए बर्खास्त
दोष सिद्ध होने के बाद एसडीएम पीयूष तिवारी ने पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कड़ी कार्रवाई की। इस धारा के अंतर्गत अनीश देवांगन को तत्काल प्रभाव से पंच के पद से बर्खास्त कर दिया गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि पट्टा बांटना किसी भी पंच के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है और ऐसा करना प्रशासनिक नियमों का सीधा उल्लंघन है। पैसे लेकर पट्टे बांटने के इस कृत्य को पद का घोर दुरुपयोग माना गया है।
6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर लगी रोक
प्रशासन ने केवल पद से हटाकर ही इतिश्री नहीं की है बल्कि अनीश देवांगन को अगले 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि वे आगामी किसी भी पंचायत चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर खड़े नहीं हो पाएंगे। एसडीएम ने बताया कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। यह प्रकरण पिछले सात-आठ महीनों से प्रक्रिया में था और सभी कानूनी पहलुओं को परखने के बाद ही यह अंतिम फैसला लिया गया है।
एफआईआर की भी बढ़ सकती है मुश्किलें
अनीश देवांगन की मुश्किलें यहीं खत्म होती नहीं दिख रही हैं। एसडीएम ने संकेत दिए हैं कि यदि ग्रामीण इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई या एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हैं, तो पुलिस जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। अवैध वसूली के इस मामले में यदि आपराधिक केस दर्ज होता है, तो उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। फिलहाल प्रशासन ने पट्टा धारकों को भी सचेत किया है कि ऐसे अवैध दस्तावेजों की कोई कानूनी मान्यता नहीं होगी।



