CG Land Patta Scheme: शहरों में सरकारी जमीन पर रहने वालों को मिलेगा मालिकाना हक: 9 साल पुराना कब्जा जरूरी, शुरू हुआ सर्वे

CG Land Patta Scheme: छत्तीसगढ़ के शहरी इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। शहरों के भीतर सरकारी जमीनों पर लंबे समय से बसे लोगों को अब बेघर होने का डर नहीं सहेगा। सरकार ने साल 2017 से पहले यानी करीब 9 साल से नगरीय क्षेत्रों में काबिज पात्र लोगों को पट्टा (भूमि स्वामित्व) देने की तैयारी शुरू कर दी है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में व्यापक स्तर पर सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है।

15 अगस्त तक पूरा होगा जमीनी सर्वे, जानिए कितने वर्गफीट पर मिलेगा अधिकार

राजस्व विभाग ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को समय सीमा तय करते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन को 15 अगस्त 2026 तक हर हाल में सर्वे का काम पूरा करके अपनी रिपोर्ट संचालक भू-अभिलेख को सौंपनी होगी। इस सर्वे को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा करने के लिए नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं जो घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन कर रही हैं।

सरकार ने पट्टा देने के लिए जमीन का दायरा भी तय कर दिया है जो इस प्रकार है:

  • नगर निगम क्षेत्रों के लिए: शहर के भीतर अधिकतम 600 वर्गफीट तक की जमीन पर काबिज लोगों को ही पट्टे का पात्र माना जाएगा।
  • नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए: छोटे शहरों और कस्बों में अधिकतम 800 वर्गफीट तक की भूमि पर कब्जा रखने वाले परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
  • नियम का उल्लंघन: निर्धारित सीमा से अधिक किया गया कोई भी कब्जा अवैध अतिक्रमण माना जाएगा और उसे हटाया जा सकता है।
  • पट्टे की अवधि: शुरुआती चरण में यह मालिकाना हक 30 साल की लीज पर दिया जाएगा, जिसे तय समय के बाद आगे नवीनीकृत (रिन्यू) कराया जा सकेगा।

इन कब्जाधारियों को नहीं मिलेगा योजना का लाभ, अपात्रों की सूची तय

सरकार ने यह साफ कर दिया है कि यह योजना केवल जरूरतमंदों और भूमिहीन परिवारों के लिए है। व्यावसायिक लाभ या अवैध रूप से जमीनों को घेरने वाले लोगों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

नियमों के मुताबिक निम्नलिखित श्रेणी के लोगों को पट्टा नहीं दिया जाएगा:

  • जिन व्यक्तियों या परिवारों के पास शहर में पहले से अपना खुद का पक्का मकान या वैध आवास उपलब्ध है।
  • तालाबों, मुख्य नालों, जलस्रोतों या नदियों के किनारे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करके किए गए कब्जे।
  • शहर के मास्टर प्लान के तहत निर्धारित ग्रीन बेल्ट, मुख्य फुटपाथों और सार्वजनिक सड़कों पर की गई बसाहट।
  • भविष्य के विकास कार्यों, सड़क चौड़ीकरण या सरकारी परियोजनाओं के आड़े आने वाले निर्माण।
  • रेलवे स्टेशन, मुख्य बस स्टैंड, अस्पताल और स्कूलों जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिसरों के आसपास किए गए अस्थायी या स्थायी कब्जे।

पात्रता सिद्ध करने के लिए ये दस्तावेज होंगे मान्य, आधार और ड्राइविंग लाइसेंस भी शामिल

पट्टे का दावा करने वाले परिवारों को यह साबित करना होगा कि वे साल 2017 से पहले से उस स्थान पर रह रहे हैं। इसके लिए राजस्व विभाग ने पहचान और पते के सबूत के तौर पर कुछ चुनिंदा सरकारी दस्तावेजों को ही मान्यता दी है।

हितग्राही पहचान के प्रमाण के तौर पर निम्नलिखित दस्तावेजों को प्रस्तुत कर सकते हैं:

  • स्थानीय विधानसभा क्षेत्र की वैध मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में दर्ज नाम।
  • परिवार के नाम पर जारी किया गया पुराना बिजली बिल या लैंडलाइन टेलीफोन बिल।
  • नगर निगम या स्थानीय निकाय में जमा किए गए संपत्तिकर (हाउस टैक्स) या समेकित कर का पुराना रिकॉर्ड।
  • नियमित रूप से किए गए जलकर (वाटर टैक्स) के भुगतान से जुड़ी सरकारी रसीदें।
  • स्थानीय प्रशासन या टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से जारी की गई भवन या दुकान निर्माण की पुरानी अनुज्ञा।
  • कम से कम 5 साल पुराना बना हुआ ड्राइविंग लाइसेंस [दस्तावेज़ ओमिटेड]।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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