
Raigarh Tamnar Coal Mine Protest: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार अंचल में इस समय जबरदस्त प्रशासनिक और सामाजिक टकराव के हालात बने हुए हैं। गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान परियोजना को लेकर आज 19 मई 2026 को होने वाली आधिकारिक जनसुनवाई से ठीक पहले स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी आर-पार के आंदोलन के मूड में आ गए हैं। एसईसीएल (SECL) और अडानी ग्रुप की इस साझा कोयला परियोजना का जमीनी विरोध इस कदर बढ़ गया है कि सुरक्षा के लिहाज से तमनार चौक से लेकर पेलमा गांव तक भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। स्थानीय लोग अपनी पुश्तैनी जमीन, जंगल और आजीविका की रक्षा के लिए तख्तियां लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।
362 हेक्टेयर हरा-भरा जंगल होगा साफ, खदान के लिए 9 लाख पेड़ों की बलि चढ़ाने की तैयारी
इस पूरे जनाक्रोश के केंद्र में पर्यावरण को होने वाला वह अपूरणीय नुकसान है, जिसका सामना आने वाले दिनों में इस पूरे अंचल को करना पड़ेगा। पेलमा और आस-पास के गांवों के आदिवासियों का कहना है कि इस प्रस्तावित ओपन-कास्ट (खुली) कोयला खदान को शुरू करने के चक्कर में लगभग 362 हेक्टेयर का सघन और समृद्ध वन क्षेत्र पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा। वन विभाग के अनुमानों के मुताबिक, इस खुदाई के लिए इलाके के करीब 9 लाख से अधिक फलदार और औषधीय पेड़ बेरहमी से काटे जाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन ही उनकी आजीविका और संस्कृति का आधार है, जिसे वे किसी भी हाल में कॉर्पोरेट घरानों के हवाले नहीं करेंगे।
चंद सामान देकर चुप कराने की कोशिश? गांवों में कुर्सी, दरी और छाता बांटने पर भड़के युवा
विवाद को हवा तब मिली जब जनसुनवाई की तारीख से ठीक पहले कुछ अज्ञात लोग गाड़ियों में भारी मात्रा में घरेलू सामान भरकर अंदरूनी ग्रामीण इलाकों में पहुंचे। पेलमा के ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि अडानी ग्रुप के स्थानीय कारिंदे आदिवासियों को लुभाने और जनसुनवाई में विरोध न करने के लिए गांवों में घूम-घूमकर लोहे की पेटी, प्लास्टिक की कुर्सियां, दरी और छाते जैसी चीजें मुफ्त में बांट रहे हैं। जैसे ही इस कथित रिश्वतखोरी की भनक स्थानीय युवाओं और महिलाओं को लगी, उनका गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने सामान बांटने आए कर्मचारियों को जमकर लताड़ लगाते हुए गांव की सीमा से खदेड़ दिया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
पुराना है विवादों का इतिहास, दिसंबर 2025 में हुई हिंसक झड़प के बाद रद्द हुई थी जनसुनवाई
तमनार के इस कोयला ब्लॉक को लेकर उपजा यह विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें काफी गहरी और हिंसक रही हैं। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी इसी गारे पेलमा खदान की जनसुनवाई के दौरान पेलमा गांव में पुलिस और प्रदर्शनकारी ग्रामीणों के बीच सीधी और तीखी हिंसक झड़प हो चुकी है। उस वक्त पथराव और लाठीचार्ज के कारण कानून व्यवस्था की स्थिति बेकाबू हो गई थी, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन को जनसुनवाई की प्रक्रिया को बीच में ही स्थगित और निरस्त करना पड़ा था। अब ठीक पांच महीने बाद दोबारा उसी प्रक्रिया को शुरू करने की कोशिश से पुराना दबा हुआ गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा है।
विपक्ष का सरकार पर सीधा हमला, कहा- नियमों को ताक पर रखकर अडानी ग्रुप को पहुंचाया जा रहा लाभ
इस संवेदनशील मामले ने अब छत्तीसगढ़ की सियासत में भी उबाल ला दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और विभिन्न आदिवासी संगठन इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर पूरी तरह हमलावर हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं का सीधा आरोप है कि पर्यावरण और विस्थापन से जुड़े कड़े नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर यह पूरी कोल माइनिंग डील केवल अडानी ग्रुप को नाजायज वित्तीय फायदा पहुंचाने के लिए की गई है। विपक्ष ने मांग की है कि पर्यावरण मंजूरी (ईसी) की इस पूरी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए और स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति के बिना एक इंच जमीन का भी अधिग्रहण न किया जाए।
प्रशासन की समझाइश बैठकें बेअसर, आदिवासियों ने किया आज होने वाली जनसुनवाई का पूर्ण बहिष्कार
बढ़ते गतिरोध और तनाव को शांत करने के लिए रायगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी लगातार पेलमा, तमनार और प्रभावित गांवों के प्रमुखों के साथ शांति बैठकें कर रहे हैं। हालांकि, इन बैठकों का जमीन पर कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है। आदिवासी समुदाय के सामाजिक प्रमुखों ने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया है कि वे उद्योगपतियों के सामने घुटने नहीं टेकेंगे। सूत्रों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों की अधिकांश ग्राम पंचायतों ने आज 19 मई को होने वाली जनसुनवाई का पूरी ताकत से शांतिपूर्ण बहिष्कार करने का सामूहिक प्रस्ताव पारित कर दिया है।



