CG Government Land Patta Distribution Rules: शासकीय जमीन पर मिलेगा मालिकाना हक: छत्तीसगढ़ में कब्जाधारियों को पट्टा देने की तैयारी तेज, जानें क्या हैं नियम और शर्तें

CG Government Land Patta Distribution Rules: छत्तीसगढ़ में लंबे समय से सरकारी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे गरीब परिवारों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने ऐसे कब्जाधारियों को मालिकाना हक यानी भू-अधिकार पत्र देने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद बलौदाबाजार जिला प्रशासन ने पट्टा वितरण की तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी सिलसिले में बलौदाबाजार नगर पालिका क्षेत्र में नए पट्टे बनाने और सर्वे कार्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूरी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया है।

नगर पालिका में हुई उच्च स्तरीय बैठक, जल्द शुरू होगा जमीनी सर्वे का काम

नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों पर बारीकी से चर्चा की गई ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस लाभ से वंचित न रह जाए। अधिकारियों ने बताया कि बहुत जल्द नगर के सभी वार्डों में संयुक्त टीमों द्वारा सर्वे का काम शुरू कर दिया जाएगा।

20 अगस्त 2017 की कट-ऑफ डेट तय, जानिए किसे और कितनी मिलेगी जमीन

शासन ने पट्टा देने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की है, जिसके आधार पर ही पात्रता का निर्धारण किया जाएगा। इस योजना से जुड़े मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

  • तय समय सीमा: जो भी परिवार 20 अगस्त 2017 या उससे पहले से शासकीय भूमि पर मकान बनाकर रह रहे हैं, केवल उन्हें ही इस योजना का पात्र माना जाएगा।
  • जमीन की अधिकतम सीमा: पात्र परिवारों को उनके वास्तविक कब्जे के आधार पर अधिकतम 800 वर्ग फीट तक की भूमि का पट्टा जारी किया जा सकेगा।
  • दस्तावेज और पंचनामा: कब्जाधारियों को तय तारीख से रहने का कोई भी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। यदि किसी के पास पर्याप्त सरकारी दस्तावेज नहीं हैं, तो स्थानीय स्तर पर तैयार पंचनामा को भी मान्यता दी जाएगी।
  • उत्तराधिकारी नियम: यदि मूल कब्जाधारी की मृत्यु हो चुकी है, तो भूमि का पट्टा उनके वैध कानूनी वारिसों यानी परिवार के सदस्यों के नाम पर ट्रांसफर करके जारी किया जाएगा।

पट्टा मिलते ही खुलेगा पीएम आवास योजना का रास्ता, पक्के मकान का सपना होगा पूरा

बैठक के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन ने कहा कि बरसों से अस्थाई या असुरक्षित ढंग से रह रहे गरीबों को जमीन का मालिकाना हक देना सरकार की प्राथमिकता है। पट्टा मिल जाने से इन परिवारों का न केवल अपने घर का सपना पूरा होगा, बल्कि वे सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी योग्य हो जाएंगे।

  • पीएम आवास योजना का लाभ: भू-अधिकार पत्र मिलते ही ये परिवार ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत पक्के मकान के लिए आवेदन कर सकेंगे।
  • वित्तीय सहायता की राह आसान: मालिकाना हक मिलने से इन जमीनों पर बैंक लोन और अन्य सरकारी सुविधाओं का रास्ता साफ हो जाएगा।
  • नेताओं ने जताया आभार: नगर पालिका अध्यक्ष ने इस जनहितैषी फैसले के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के प्रति धन्यवाद प्रकट किया।

इन क्षेत्रों में रहने वालों को नहीं मिलेगा योजना का लाभ, पात्रता की शर्तें हैं कड़ी

सरकारी जमीन पर पट्टा देने के नियम जितने राहत देने वाले हैं, उतने ही कड़े भी रखे गए हैं ताकि सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो। शासन ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित श्रेणियों को इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा:

  • प्रतिबंधित क्षेत्र: तालाब के किनारे, नाला, ग्रीन बेल्ट (पर्यावरण क्षेत्र), फुटपाथ और सार्वजनिक परिसरों या सरकारी बिल्डिंगों के आसपास किए गए कब्जों को वैध नहीं किया जाएगा।
  • पुराने पट्टाधारी: जिन नागरिकों के नाम पर पहले से ही शहर या गांव में कोई पट्टा अथवा भू-अधिकार पत्र मौजूद है, वे इस नई प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकेंगे।
  • भौतिक सत्यापन अनिवार्य: सर्वे के दौरान राजस्व विभाग और पार्षदों की संयुक्त टीम मौके पर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करेगी और कब्जे के समय की गहन जांच करेगी।

आम जनता में खुशी की लहर, पारदर्शी प्रक्रिया की उम्मीद

इस फैसले के बाद गरीब तबके और बस्ती इलाकों में खुशी का माहौल है। सालों से बेदखली के डर में जी रहे लोगों को अब स्थाई ठिकाना मिलने की उम्मीद बंधी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सर्वे की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि किसी भी रसूखदार व्यक्ति के बजाय केवल वास्तविक जरूरतमंद और गरीब परिवारों को ही इस योजना का सीधा लाभ मिल सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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