
CG Mahtari Vandan Yojana eKYC Verification List: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी ई-केवाईसी (e-KYC) और भौतिक सत्यापन अभियान के दौरान सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान विभाग ने अब तक राज्य की करीब 27 हजार अपात्र महिलाओं की मासिक किस्तें रोक दी हैं। इसके साथ ही योजना का लाभ ले रहे करीब एक लाख मृत हितग्राहियों के नाम भी सरकारी रिकॉर्ड से पूरी तरह हटा दिए गए हैं। इस बड़ी छंटनी के बाद से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो अपात्र होने के बावजूद गलत तरीके से सरकारी पैसे का लाभ उठा रहे थे।
सरकारी खजाने के दुरुपयोग पर रोक लगाने की कवायद, दो चरणों में पूरा होगा भौतिक सत्यापन
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक योजना का पैसा केवल जरूरतमंद और असली पात्र महिलाओं के बैंक खातों तक ही पहुंचे, इसके लिए यह कड़ा कदम उठाया गया है। इस पूरी सत्यापन प्रक्रिया का पहला चरण नवंबर के महीने में शुरू किया गया था, जिसके अंतर्गत 4.18 लाख लाभार्थियों के दस्तावेजों की जांच की गई थी। इसके बाद योजना का दूसरा चरण अप्रैल महीने से शुरू हो चुका है, जो आगामी 30 जून तक अनवरत चलेगा। इस समय सीमा के भीतर जिन महिलाओं की पात्रता संदिग्ध मिलेगी, उन्हें महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालयों में खुद उपस्थित होकर 31 अगस्त तक अपना व्यक्तिगत सत्यापन कराना होगा।
कॉमन सर्विस सेंटर्स के जरिए चल रहा है अभियान, रायपुर जिले में 4 लाख से ज्यादा लाभार्थी
पूरे छत्तीसगढ़ में ई-केवाईसी का काम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है। अब तक राज्य के लगभग 86 प्रतिशत लाभार्थियों ने अपनी डिजिटल ई-केवाईसी की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य की कुल 65.30 लाख पंजीकृत महिलाओं में से अब तक करीब 55.99 लाख महिलाओं का आधार आधारित सत्यापन पूरा किया जा चुका है। अगर केवल राजधानी रायपुर जिले की बात करें, तो यहां वर्तमान में 4.27 लाख से अधिक महिलाएं इस योजना के दायरे में शामिल हैं।
सरकारी नौकरी मिलने और दोहरे आवेदनों के कारण रुकी किस्त, गलत तरीके से लाभ लेने वालों से होगी वसूली
सत्यापन के दौरान कई ऐसे मामले भी प्रकाश में आए हैं जिनमें योजना की शुरुआत होने के बाद महिलाओं को स्थायी सरकारी नौकरी मिल गई। इसके अलावा कुछ सक्षम महिलाओं ने अपनी मर्जी से योजना का लाभ छोड़ दिया है, जबकि कई चालाक आवेदकों द्वारा दो अलग-अलग जगहों से फर्जी तरीके से दोहरे आवेदन जमा कर दिए गए थे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर या फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी राशि का आहरण किया है, उनकी किस्तें रोकने के साथ-साथ अब तक मिली कुल राशि की वसूली भी भू-राजस्व की तरह की जाएगी।
प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों के परिवारों ने भी लिया लाभ, बाहरी राज्यों के निवासी भी आए पकड़ में
जांच दल को छानबीन के दौरान सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई जब शासन के प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के नियमित अधिकारियों और कर्मचारियों के आश्रित परिजनों द्वारा भी इस योजना का लाभ लेने के पुख्ता प्रमाण मिले। नियमों के मुताबिक ऐसे संपन्न परिवारों को इस आर्थिक सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों की सीमा से लगे जिलों में कई ऐसे फर्जी आवेदन भी पकड़े गए हैं, जो मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी नहीं हैं, लेकिन गलत तरीके से स्थानीय निवास प्रमाण पत्र बनवाकर हर महीने योजना की राशि डकार रहे थे।
जिलों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट: बालोद जिला सत्यापन में सबसे आगे, कवर्धा और कोरबा भी टॉप 5 में शामिल
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में ई-केवाईसी अभियान की प्रगति की बात करें, तो बालोद जिला पूरे प्रदेश में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। बालोद में सबसे अधिक 93.22 प्रतिशत महिला हितग्राहियों का डिजिटल सत्यापन पूरा हो चुका है। इस सूची में बालोद के बाद कबीरधाम (कवर्धा), बलौदाबाजार, कोरबा और रायगढ़ जिले भी अपनी बेहतर कार्यप्रणाली के कारण टॉप पांच जिलों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। इन जिलों में प्रशासन की मुस्तैदी और शिविरों के आयोजन की वजह से ग्रामीण महिलाओं ने समय पर अपने बैंक खातों को आधार से लिंक करा लिया है।
बस्तर संभाग के सुदूर वनांचल में सुस्त पड़ी रफ्तार, इंटरनेट और संसाधनों की कमी बनी बड़ी बाधा
मैदानी इलाकों के विपरीत बस्तर संभाग के आदिवासी बाहुल्य जिलों में ई-केवाईसी की जमीनी स्थिति बेहद चिंताजनक और धीमी बनी हुई है। कोंडागांव, बस्तर, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और दंतेवाड़ा जैसे अंदरूनी जिलों में सत्यापन का ग्राफ काफी नीचे है। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इन पहुंचविहीन क्षेत्रों में जागरूकता की भारी कमी है। इसके अलावा घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, मोबाइल नेटवर्क का न रहना और दूरस्थ गांवों में तकनीकी संसाधनों का अभाव इस धीमी रफ्तार की मुख्य वजहें हैं, जिसे सुधारने के लिए अब विशेष मोबाइल वैन चलाई जा रही हैं।
जानिए क्या है महतारी वंदन योजना, विवाहित महिलाओं को हर महीने मिलती है 1,000 रुपए की आर्थिक मदद
महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ सरकार की एक अत्यंत लोकप्रिय और कल्याणकारी योजना है, जिसका औपचारिक शुभारंभ देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा 10 मार्च 2024 को किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की विवाहित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार करना है। योजना के नियमों के तहत छत्तीसगढ़ की मूल निवासी और पात्र विवाहित महिलाओं, विधवाओं तथा परित्यक्ता महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए सरकार की तरफ से सीधे उनके बैंक खातों में हर महीने 1,000 रुपये यानी सालभर में कुल 12,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि भेजी जाती है।



