PM Ujjwala Yojana Subsidy Price Cut: उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब एक साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर, जेब पर बढ़ेगा बोझ, जानें नई कीमत

PM Ujjwala Yojana Subsidy Price Cut: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली गैस सब्सिडी को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है. सरकार ने इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को दिए जाने वाले रियायती एलपीजी सिलेंडरों की सालाना संख्या में भारी कटौती कर दी है. नए नियमों के मुताबिक, अब उज्ज्वला योजना के कार्डधारकों को साल भर में केवल 4 सिलेंडरों पर ही सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा. इससे पहले सरकार ने यह सीमा 9 सिलेंडर तय कर रखी थी, जबकि साल 2016 में जब इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई थी, तब गरीब परिवारों को सालाना 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर दिए जाते थे.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कटौती का कारण, औसत वार्षिक खपत को आधार मानकर तय की गई नई सीमा

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस कटौती की आधिकारिक जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सिलेंडरों की संख्या को सीमित करने का फैसला उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत सालाना खपत को ध्यान में रखकर लिया गया है. मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले अधिकांश परिवार साल भर में औसतन चार सिलेंडरों का ही इस्तेमाल कर पाते हैं. इसी व्यावहारिक उपभोग को आधार बनाकर सरकार ने कोटा तय करने का फैसला किया है.

300 रुपये की छूट के बाद अब इतने में मिलेगा सिलेंडर, सीधे खाते में ट्रांसफर होगी रिफिल की राशि

संख्या में कटौती के बावजूद सरकार ने प्रति सिलेंडर मिलने वाली छूट की रकम में कोई बदलाव नहीं किया है. वर्तमान व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को मिलने वाली 300 रुपये की केंद्रीय सब्सिडी जारी रहेगी. इस छूट के बाद उज्ज्वला योजना के ग्राहकों को एक डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडर के लिए 642 रुपये का भुगतान करना होगा. यह सब्सिडी सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) माध्यम से रिफिलिंग के बाद लाभार्थियों के लिंक किए गए बैंक खातों में जमा करा दी जाएगी.

साल 2016 में महिलाओं को स्वच्छ ईंधन देने के लिए शुरू हुई थी योजना, समय के साथ बदलते रहे नियम

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के आर्थिक रूप से पिछड़े और ग्रामीण परिवारों की वयस्क महिलाओं के नाम पर बिना कोई सिक्योरिटी डिपॉजिट लिए मुफ्त एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराना था. सरकार की मंशा थी कि लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक नुकसानदेह ईंधनों की जगह ग्रामीण भारत में स्वच्छ रसोई गैस के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हो सके.

साल 2022 में शुरू हुई थी नकद सब्सिडी की व्यवस्था, पिछले साल बढ़ाकर किए गए थे 300 रुपये

योजना के शुरुआती वर्षों के बाद सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला कार्डधारकों के लिए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की विशेष लक्षित सब्सिडी देने की शुरुआत की थी. यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए उठाया गया था. इसके बाद अक्टूबर 2023 में त्योहारों के सीजन को देखते हुए सरकार ने राहत का दायरा और बढ़ाते हुए इस सब्सिडी को 200 रुपये से बढ़ाकर सीधे 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया था.

सरकारी खजाने पर आया 52 हजार करोड़ की सब्सिडी का बोझ, तेल कंपनियों को अब भी हो रहा भारी घाटा

अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने प्रेस वार्ता में वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि साल 2022 से लेकर अब तक केंद्र सरकार उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को लगभग 52,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी बांट चुकी है. इस भारी वित्तीय मदद के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को बाजार की वास्तविक लागत के कारण प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर करीब 700 रुपये का घाटा सहना पड़ रहा है.

पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी आई तेजी, लागत और बिक्री मूल्य के अंतर से जूझ रही हैं कंपनियां

मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, केवल रसोई गैस ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री पर भी तेल कंपनियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले घरेलू बाजार में ईंधन काफी कम दाम पर बेचना पड़ रहा है. इसी घाटे की भरपाई और वित्तीय संतुलन बनाने के लिए हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी आंशिक बढ़ोतरी की गई है ताकि कंपनियों की वित्तीय स्थिति को सुधारा जा सके.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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