
BJP MLA Ajay Chandrakar on Congress leader Rahul Gandhi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश भर में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब छत्तीसगढ़ की राजनीति भी गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। अजय चंद्राकर ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान जी ने पद छोड़कर यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक और नैतिक मूल्यों की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि रहा है और पार्टी नैतिक आधार पर फैसले लेने से कभी पीछे नहीं हटती।
राहुल गांधी की मांगों पर भाजपा विधायक का करारा पलटवार
इस्तीफे से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्यालय इंदिरा भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक रूप से युवाओं से माफी मांगने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही थी। राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए थे। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अजय चंद्राकर ने राहुल गांधी की इन्हीं मांगों पर सीधा हमला बोला है।
क्या छत्तीसगढ़ के युवाओं से माफी मांगेंगे राहुल गांधी
अजय चंद्राकर ने सीधे राहुल गांधी से सवाल करते हुए पूछा कि क्या वह छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए बहुचर्चित सीजीपीएससी घोटाले के लिए देश के युवाओं से माफी मांगेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी में उस समय की कांग्रेस सरकार और जिम्मेदार नेतृत्व के खिलाफ कार्रवाई करने का नैतिक साहस है। भाजपा विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि क्या राजनीतिक नैतिकता की बातें सिर्फ दूसरों पर सवाल उठाने के लिए की जाती हैं या कांग्रेस खुद भी इसका पालन करेगी।
पीएम मोदी के वादे और टामन सोनवानी की गिरफ्तारी का जिक्र
भाजपा विधायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया था। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के युवाओं से निष्पक्ष सीबीआई जांच का वादा किया था, जिसे केंद्र सरकार ने पूरा करके दिखाया। विधायक चंद्राकर ने कहा कि सीजीपीएससी घोटाले की निष्पक्ष जांच के चलते ही आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी समेत कई रसूखदार लोग आज जेल की सलाखों के पीछे हैं।
जानिए क्या है CGPSC घोटाला?
यह मामला CGPSC 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के करीबियों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे उच्च पदों पर चयनित किया गया। योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी के इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी, जिसने छापेमारी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और साक्ष्य बरामद किए हैं।
171 पदों के लिए आयोजित हुई थी परीक्षा
CGPSC परीक्षा 2021 के तहत कुल 171 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इसकी प्रारंभिक परीक्षा (Pre-Exam) 13 फरवरी 2022 को हुई, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद मई 2022 में आयोजित मुख्य परीक्षा (Mains) में 509 अभ्यर्थियों ने सफलता पाई, जिसके बाद इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी कर 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की अंतिम चयन सूची जारी की गई थी।



