
मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा “Mental Health Care” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ पारंपरिक सरस्वती पूजन के साथ किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा मानसिक स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े समकालीन मुद्दों एवं नवीन आयामों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा मुख्य अतिथि तथा काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. अम्बा सेठी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
अपने उद्बोधन में डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सिकल सेल एनीमिया के क्षेत्र में अपने अनुभवों और योगदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि धैर्य (Patience) व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो जीवन की चुनौतियों और तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने में सहायता करता है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा समाज के विभिन्न स्तरों पर मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य वक्ता डॉ. अम्बा सेठी ने अपने व्याख्यान में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों, समय रहते पहचान एवं हस्तक्षेप की आवश्यकता तथा परामर्श एवं मनोचिकित्सा की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के लिए जागरूकता एवं संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।इस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का संयोजन डॉ. शाइस्ता अंसारी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग ने किया।

कार्यक्रम में कुलपति (प्रो.) डॉ. के. पी. यादव एवं कुलसचिव श्री गोकुलानंदा पांडा ने मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक शैक्षणिक विमर्श के लिए मंच प्रदान करने हेतु मनोविज्ञान विभाग के प्रयासों की सराहना की । साथ ही माननीय कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया एवं महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया ने अपने शुभाशीष एवं मंगलकामनाएँ प्रेषित करते हुए कॉन्फ्रेंस की सफलता तथा प्रतिभागियों के उज्ज्वल योगदान की कामना की।



