Gaon Chhattisgarhi Shayari: छत्तीसगढ़ी माटी, संस्कृति अउ गँवई जिनगी: सुग्घर गांव छत्तीसगढ़ी शायरी

Gaon Chhattisgarhi Shayari: छत्तीसगढ़ी भाषा अउ संस्कृति म एक अईसन सोंधी महक अउ मिठास हे, जो सीधा मनखे के दिल म उतर जाते। यहाँ के खेत-खार, सुग्घर बिहिनिया, बोरी-बासी, अउ गांव के मनखे मन के सीधापन पूरे देश म एक अलग पहिचान रखथे। जब हमन अपन माटी अउ गँवई जिनगी ल सायरी के माध्यम ले व्यक्त करथन, त ओकर रंग अउ चोख हो जाते। आवव, छत्तीसगढ़ी संस्कृति, माटी अउ ग्रामीण परिवेश ले जुड़े 10 बेहतरीन शायरी मन के आनंद लेवन:

1. मया के खुशबू अउ गांव के गली

तोर मया के खुशबू ह, माटी कस महकत हे।

मोर गांव के गलिया म, जवानी ह चहकत हे।

2. छत्तीसगढ़ के माटी के महत्ता

खेत-खार के हरियाली, गांव के असली शान आय।

छत्तीसगढ़ के माटी ह, सबले बढ़ियां महान आय।

3. संजहा के बेरा अउ सुघ्घर माहौल

संजहा के बेरा झुरमुर, चिरई-चिरगुन के बोली।

मोर गांव ह कतका सोहावन, जइसे मया के गोली।

4. धरती दाई अउ गँवई जिंदगी

पइया परे माटी ला, जेहला हमन दाई मानथन।

गांव के गँवई जिंदगी ला, हम सब जिनगी जानथन।

5. सावन के पुरवइया अउ हरियाली

सावन के पुरवइया म, मन हरियर हो जाथे।

गांव के डबरा-खोर ह, അड़बड़ सुघर दिखाथे।

6. बोली के मिठास अउ सादगी

तोर बोली के मिठास ह, सक्कर ले घलो जादा हे।

गांव के सीधा मनखे मन म, अपनपन के सादा हे।

7. छत्तीसगढ़िया सुआद: कोदो-कुटकी अउ भाजी

कोदो-कुटकी के भात अउ, लाल भाजी के स्वाद।

गांव के छुपे जिनगी म, कतका भारी आबाद।

8. गोबर ले लीपे आंगन अउ तुलसी दिया

गोबर अउ लीपे आंगन, तुलसी के दिया बारथे।

गांव के सोंधी माटी ह, मोला सराबोर करथे।

9. गँवई बिहिनिया अउ मधुर आवाज

बेलना के खटर-पटर अउ, चक्की के सुरताल।

गांव के सुघर बिहिनिया, मिटा दे सबो सवाल।

10. माटी अउ मया के आघू सब फीका

चांद-सूरज के रोशनी, फीका लागथे गांव के आगे।

छत्तीसगढ़ के माटी अउ मया, दिल म सदा जागे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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