
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के नवागढ़ विकासखंड के एक सरकारी स्कूल में पदस्थ शिक्षक और शिक्षिका से जुड़ा एक कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है. जैसे ही यह वीडियो स्थानीय लोगों और वाट्सएप ग्रुप्स में पहुंचा, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. इस घटना को लेकर बच्चों के माता-पिता, स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. सभी ने इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है ताकि हकीकत सामने आ सके.
क्लासरूम में चोरी-छिपे बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ लीक
परेशानी खड़ी करने वाला यह वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाने लगा. इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि स्कूल की छुट्टी होने के बाद या खाली समय में एक क्लासरूम के भीतर दोनों संदिग्ध परिस्थितियों में मौजूद थे, तभी किसी ने खिड़की या दरवाजे से इनका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया. यह क्लिप जैसे ही इंटरनेट पर आई, क्षेत्र के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. लोग इस पूरे घटनाक्रम को शिक्षा के पेशे और स्कूल जैसे पवित्र स्थान की मर्यादा के खिलाफ बता रहे हैं.
बच्चों के भविष्य को लेकर डरे अभिभावकों ने जताई गहरी नाराजगी
वीडियो के सामने आने के बाद से ही बच्चों को स्कूल भेजने वाले माता-पिता के बीच गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल एक ऐसा स्थान है जहां बच्चे अपने भविष्य का निर्माण करने और अच्छे संस्कार सीखने आते हैं. अगर वहां पदस्थ गुरु ही इस तरह की गतिविधियों के घेरे में आएंगे, तो विद्यार्थियों पर इसका बेहद बुरा असर पड़ेगा. जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.
विभागीय अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए गठित की विशेष कमेटी
जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने लगा, जिला शिक्षा विभाग के आला अधिकारी भी तुरंत हरकत में आ गए. जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रारंभिक स्तर पर विभागीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि यह वीडियो वास्तव में उसी स्कूल का है या नहीं, और इसे कब रिकॉर्ड किया गया था, इन सभी पहलुओं की तकनीकी जांच कराई जा रही है. विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की अफवाहें फैलाने से बचें.
जिला शिक्षा अधिकारी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही
इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा ने विभाग का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है. उन्होंने मीडिया को बताया कि संबंधित वीडियो उनके संज्ञान में भी आया है और इसकी सत्यता को जांचने के निर्देश दे दिए गए हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षा विभाग में इस तरह की अनुशासनहीनता और अनैतिक आचरण के लिए कोई स्थान नहीं है. यदि जांच रिपोर्ट में वीडियो में दिख रहे कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत तत्काल कड़ी निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
घटना के बाद सभी सरकारी स्कूलों की मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश
इस विवाद ने जांजगीर-चांपा जिले के भीतर स्कूलों की देखरेख और वहां के प्रशासनिक नियंत्रण पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण बढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि शाला अवधि के दौरान या उसके बाद परिसरों का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए ही हो. फिलहाल पुलिस की साइबर विंग भी इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस वीडियो को सबसे पहले किस सोशल मीडिया हैंडल या मोबाइल नंबर से इंटरनेट पर अपलोड किया गया था.



