
Nakti Village MLA Colony Encroachment: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. गांव के 77 परिवारों को जिला प्रशासन की तरफ से 48 घंटे के भीतर जमीन खाली करने का कड़ा नोटिस थमाया गया है. सरकारी अमला जहां इस पूरी कार्रवाई को शासकीय राजस्व भूमि से अवैध कब्जा हटाने की मुहिम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित ग्रामीणों का दावा है कि वे पीढ़ियों से इस जगह पर अपना आशियाना बनाकर रह रहे हैं. इस अचानक आई बेदखली की खबर से पूरे गांव में हड़कंप मच गया है और लोग अपने आशियाने को बचाने की गुहार लगा रहे हैं.
मासूमों की बेफिक्री
प्रशासनिक नोटिस मिलने के बाद गांव के बड़ों के बीच जहां तनाव का माहौल है, वहीं गांव की चौपाल पर बच्चे अपनी ही दुनिया में मग्न हैं. कुछ बच्चियां कंचे और पारंपरिक खेल खेलने में व्यस्त नजर आईं जिनके चेहरों पर हालात से बेखबर एक सहज मुस्कान दिखाई देती है. इन मासूमों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि जिन आंगनों में वे रोजाना खेलते हैं, वहां प्रशासन ने बेदखली का फरमान चस्पा कर दिया है और उनके सिर से छत छिनने का खतरा मंडरा रहा है.
पुनर्वास की मांग
इस कार्रवाई से प्रभावित हो रहे परिवारों के सामने अब सबसे बड़ा संकट यह है कि अगर उनके घर तोड़े गए तो वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएंगे. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सालों पहले विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत ही यहां रहने के लिए मकान मिले थे, जिनमें बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी प्रशासन ने खुद मुहैया कराई थीं. इतने सालों तक किसी भी विभाग ने उनके रहने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की, इसलिए अब अचानक बिना किसी पुनर्वास योजना के उन्हें इस तरह बेघर करना पूरी तरह गलत है.
आधी रात को नोटिस
गांव के लोगों ने बताया कि शुक्रवार की देर रात जब पूरा गांव सोने की तैयारी कर रहा था, तब पुलिस बल की मौजूदगी में राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने घर-घर जाकर नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई की. राजस्व अधिकारियों के मुताबिक करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन पर इन परिवारों का कब्जा है और नियमों के तहत यह उन्हें जारी किया गया तीसरा नोटिस है. इससे पहले भी जब यहां कब्जा हटाने की कोशिश की गई थी, तब ग्रामीणों के लंबे विरोध प्रदर्शन के कारण मामला शांत हो गया था.
ग्रामीणों की बेचैनी
नोटिस चस्पा होने के बाद से गांव के युवाओं और बुजुर्गों के बीच सिर्फ अपने भविष्य और रोजी-रोटी को लेकर ही चर्चा हो रही है. युवा वर्ग अपने मोबाइल और कागजातों में जमीन के पुराने रिकॉर्ड खंगालने में जुटा हुआ है ताकि कानूनी तौर पर अपनी बात रख सके. वहीं दूसरी ओर गांव के बुजुर्ग जिन्होंने दशकों पहले कड़ी मेहनत से इस बत्ती को बसाया था, वे अपनी आंखों के सामने अपनी गृहस्थी उजड़ने की आशंका से पूरी तरह खामोश और परेशान बैठे हैं.
सांसद का आश्वासन
संकट की इस घड़ी में परेशान ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात करने पहुंचा. ग्रामीणों की पीड़ा सुनने के बाद सांसद ने इस संवेदनशील मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावित लोगों के साथ एक संयुक्त बैठक की. बृजमोहन अग्रवाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जब तक इन प्रभावित परिवारों के लिए रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था या ठोस पुनर्वास योजना तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसी भी स्थिति में तोडू कार्रवाई नहीं की जाएगी.
मुख्यमंत्री से चर्चा
सांसद ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि किसी भी गरीब को बेघर करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल नहीं है. उन्होंने कहा कि वे इस पूरे विषय को लेकर खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सीधे बातचीत करेंगे ताकि दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकाला का सके. उन्होंने यह भी साफ किया कि कल्याणकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनता को राहत पहुंचाना होता है, न कि उन्हें किसी नए संकट में डालना.
कीमती जमीन पर नजर
भौगोलिक दृष्टि से नकटी गांव की लोकेशन बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह इलाका माना एयरपोर्ट, पुराने रायपुर शहर और नवा रायपुर के ठीक बीच में स्थित है. इसी बेहतरीन कनेक्टिविटी की वजह से प्रशासन ने यहां वीआईपी आवासीय परिसर यानी विधायक कॉलोनी विकसित करने का खाका तैयार किया है. हालांकि ग्रामीणों का तर्क है कि नवा रायपुर में सरकार के पास पहले से ही हजारों एकड़ खाली जमीन पड़ी हुई है, जहां बिना किसी को उजाड़े इस कॉलोनी का निर्माण आसानी से किया जा सकता है.
नहीं जले चूल्हे
प्रशासनिक नोटिस की समय सीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, गांव के लोगों का डर बढ़ता जा रहा है. इस खौफ के कारण शनिवार को गांव के कई घरों में सुबह का चूल्हा तक नहीं जला और लोग बिना खाए-पिए दिनभर चौपाल पर ही जमा रहे. दोपहर बाद जब सांसद की तरफ से कार्रवाई रोकने का आश्वासन मिला, तब जाकर ग्रामीणों को थोड़ी राहत महसूस हुई. फिलहाल पूरे गांव की नजरें अब सोमवार को प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली हलचल पर टिकी हुई हैं.



