
Chaitanya Baghel Supreme Court Relief: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उच्चतम न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी नियमित जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और छत्तीसगढ़ शासन की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा चैतन्य बघेल को दी गई जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को किया खारिज, जमानत आदेश पर जताई सहमति
CG Liquor Scam Supreme Court Decision: मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने एजेंसियों द्वारा नियमित रूप से जमानत आदेशों को चुनौती दिए जाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल यह तर्क देना कि निचली अदालत या हाईकोर्ट के आदेश में कानूनी त्रुटि है, किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को समाप्त करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट की टिप्पणियों को हटाने का दिया निर्देश
हालांकि, याचिकाओं को खारिज करने के साथ ही उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार की एक मांग को आंशिक रूप से स्वीकार किया। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच प्रणाली के खिलाफ की गई प्रतिकूल और तल्ख टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना था कि जांच एजेंसी के प्रशासनिक कामकाज पर टिप्पणी की जगह मामले के तथ्यों पर ध्यान केंद्रित रहना चाहिए।
2 जनवरी को हाईकोर्ट से मिली थी जमानत
इससे पहले 2 जनवरी को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा ने ईडी और ईओडब्ल्यू/एसीबी दोनों की ओर से दर्ज प्रकरणों में चैतन्य बघेल को नियमित जमानत दे दी थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि मामले की जांच दो वर्षों से अधिक समय से चल रही है और आरोपी जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उपलब्ध तथ्यों और लंबी जांच अवधि को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर की थी।
करीब 3500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा है मामला
जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य में आबकारी नीति और शराब बिक्री में अनियमितताएं कर करीब 3500 करोड़ रुपये का कथित घोटाला किया गया, जिससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हुआ। ईडी ने इस मामले में चैतन्य बघेल को जुलाई में और ईओडब्ल्यू ने सितंबर में गिरफ्तार किया था। एजेंसियों का आरोप है कि अवैध लेन-देन का लाभ चैतन्य बघेल तक भी पहुंचा, जबकि बचाव पक्ष इन आरोपों को शुरू से ही बेबुनियाद बताता रहा है।



