
CG School Teachers Transfer Case: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक शिक्षिका के स्थानांतरण आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उसके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी तबादला आदेश में पारस्परिक यानी म्यूचुअल ट्रांसफर का उल्लेख किया गया था। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि याचिकाकर्ता शिक्षिका ने इसके लिए न तो कोई आवेदन दिया था और न ही किसी प्रकार की सहमति जताई थी। न्यायमूर्ति बीडी गुरु की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षिका को उनके वर्तमान पदस्थापना स्कूल में ही सेवा जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
8 महीने पहले ही मिली थी पदस्थापना
Bilaspur High Court Verdict: यह मामला कोरबा विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामपुर में पदस्थ शिक्षिका राजकुमारी सोनी से जुड़ा है। उनके अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश शुक्ला ने अदालत में याचिका दायर कर बताया कि 25 अगस्त 2026 को विभाग ने एक आदेश जारी किया था। इसके जरिए शिक्षिका को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय चैतमा में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। याचिका में तर्क दिया गया कि शिक्षिका को दिसंबर 2025 में ही यह पदस्थापना मिली थी। महज 8 महीने के भीतर दोबारा स्थानांतरण करना नीति के नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
कोर्ट ने उठाए सवाल
CG Education Department Case: सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया कि प्रशासनिक आदेश में इस तबादले का आधार म्यूचुअल ट्रांसफर दर्ज किया गया है। जब शिक्षिका ने किसी अन्य शिक्षक के साथ स्थान बदलने के लिए आवेदन ही नहीं किया, तो विभागीय दस्तावेजों में इस कारण को दर्ज करना पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है। कोर्ट के सामने यह बात रखी गई कि विभागीय स्तर पर तथ्यों के साथ फेरबदल करके यह मनमाना आदेश जारी किया गया है।
लंबी न्यायिक लड़ाई के बाद मिली थी नियुक्ति
Chhattisgarh High Court Order: याचिका में इस तथ्य पर विशेष जोर दिया गया कि राजकुमारी सोनी को रामपुर स्कूल में पोस्टिंग काफी संघर्षों के बाद मिली थी। यह पदस्थापना वर्ष 2012 और 2024 से चली आ रही लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद दिसंबर 2025 में संभव हो सकी थी। इतनी जटिल कानूनी प्रक्रिया से गुजरने के तुरंत बाद बिना किसी ठोस आधार और बिना प्रक्रिया का पालन किए दोबारा तबादला आदेश थमा देना शिक्षिका के अधिकारों का हनन है।25 अगस्त के आदेश के अमल पर लगाई रोक
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए सभी दस्तावेजों और तथ्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि महज 8 महीने पहले पदस्थ की गई शिक्षिका का बिना सहमति ट्रांसफर करना प्रथम दृष्टया अनुचित प्रतीत होता है। स्थिति को स्पष्ट देखते हुए पीठ ने 25 अगस्त 2026 को जारी किए गए स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक पूरी तरह से रोक लगा दी है।
राज्य सरकार को मिला 3 हफ्ते का समय
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने कोर्ट का नोटिस स्वीकार किया। शासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम और ट्रांसफर के आधार पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए 3 सप्ताह का समय मांगा गया है। कोर्ट ने सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने की अनुमति दे दी है।
1 अक्टूबर 2026 को होगी अगली सुनवाई
बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 1 अक्टूबर 2026 तय की है। अदालत के इस अंतरिम राहत वाले आदेश के बाद अब शिक्षिका राजकुमारी सोनी बिना किसी रुकावट के अपने वर्तमान रामपुर स्थित स्कूल में ही अपनी सेवाएं देती रहेंगी। 1 अक्टूबर को राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब के बाद इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।



